Thursday, July 30, 2026
माँ बिजाई गेहल गांव यात्रा

18 वर्षों बाद गेहल गांव पहुंचीं माँ बिजाई, श्रद्धा और भक्ति में डूबा पूरा गिरिपार क्षेत्र

हरिपुरधार/सिरमौर।
गिरिपार क्षेत्र के गेहल गांव में 18 वर्षों बाद आयोजित हो रहे माँ बिजाई के जागरण को लेकर गुरुवार को पूरे क्षेत्र में आस्था, श्रद्धा और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला। बढ़ोल गांव स्थित प्राचीन एवं भव्य मंदिर से माँ बिजाई पालकी में विराजमान होकर गेहल गांव के लिए रवाना हुईं। इस ऐतिहासिक धार्मिक यात्रा में सैकड़ों श्रद्धालु शामिल हुए, जबकि मार्ग में हजारों भक्तों ने माता के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

सुबह करीब 10 बजे जैसे ही माँ बिजाई की पालकी मंदिर परिसर से निकली, पूरा क्षेत्र माता के जयकारों से गूंज उठा। ढोल-नगाड़ों, रणसिंघों और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की मधुर धुनों के बीच श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से माता का स्वागत किया।

14 किलोमीटर पैदल यात्रा में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब

बढ़ोल से गेहल गांव तक लगभग 14 किलोमीटर लंबी यात्रा श्रद्धालुओं ने पैदल पूरी की। यात्रा के दौरान लालग, कोरग, डसाकना, गहाऊ, बड़वा और डिमाइना सहित कई गांवों में ग्रामीणों ने माता की पालकी का भव्य स्वागत किया।

कोरग पहुंचते-पहुंचते श्रद्धालुओं की संख्या हजारों में पहुंच गई। माता के जयकारों और धार्मिक उत्साह से पूरा मार्ग भक्तिमय वातावरण में बदल गया।

चार पंचायतों में गूंजे जयकारे, दिखी देव संस्कृति की झलक

माँ बिजाई की इस ऐतिहासिक यात्रा के दौरान चार पंचायतों के क्षेत्र में ढोल-नगाड़ों और जयकारों की गूंज लगातार सुनाई देती रही। ग्रामीणों और श्रद्धालुओं ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ माता का स्वागत कर अपनी आस्था प्रकट की।

18 वर्षों बाद आयोजित हो रहे इस धार्मिक आयोजन को लेकर लोगों में विशेष उत्साह देखने को मिला। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह आयोजन केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि क्षेत्र की समृद्ध देव संस्कृति, सामाजिक एकता और परंपराओं का जीवंत उदाहरण भी है।

भक्ति, परंपरा और एकता का बना संदेश

श्रद्धालुओं ने कहा कि माँ बिजाई की यह यात्रा क्षेत्रवासियों के लिए आस्था का सबसे बड़ा पर्व है। इस आयोजन ने एक बार फिर लोगों को अपनी सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक परंपराओं से जोड़ने का कार्य किया है। गेहल गांव में आयोजित होने वाला जागरण अब क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक आयोजनों में शामिल हो गया है।