अंबाला: अंबाला छावनी स्थित गवर्नमेंट पीजी कॉलेज का परिसर इतिहास और विज्ञान की अनूठी विरासत समेटे हुए है। यहां मौजूद वर्ष 1893 का ऐतिहासिक शिलापट्ट बीते दौर की याद दिलाता है। इस शिलापट्ट पर अंबाला का नाम आज की प्रचलित स्पेलिंग Ambala की जगह Umbala लिखा हुआ है। कॉलेज परिसर में मौजूद सूर्य घड़ी भी आकर्षण का केंद्र है, जो सूर्य की रोशनी और परछाई के जरिए समय का संकेत देती है।
1893 का शिलापट्ट इतिहास की याद दिलाता है
कॉलेज परिसर में लगा ऐतिहासिक शिलापट्ट उस दौर की पहचान को दर्शाता है, जब भारत में अंग्रेजी शासन था। बताया जाता है कि उस समय यहां इंडो-मोहम्मडन स्कूल संचालित होता था। शिलापट्ट पर दर्ज Umbala की स्पेलिंग खास ध्यान खींचती है और अंबाला के पुराने नाम-लेखन की झलक दिखाती है।
सूर्य घड़ी से मिलता है समय का संकेत
कॉलेज में मौजूद सन वॉच यानी सूर्य घड़ी भी अपनी खासियत के कारण लोगों का ध्यान आकर्षित करती है। इस घड़ी को समय का संकेत देने के लिए बैटरी या बिजली की जरूरत नहीं होती। यह सूर्य की रोशनी और उसकी दिशा पर आधारित होती है।
सूर्य की स्थिति बदलने के साथ घड़ी पर पड़ने वाली परछाई भी अपनी जगह बदलती है। घड़ी पर अंकित समय के निशानों के आधार पर समय का अनुमान लगाया जा सकता है। यह पारंपरिक तकनीक सदियों से समय मापने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले वैज्ञानिक सिद्धांत को समझने का अवसर देती है।
विद्यार्थियों के लिए इतिहास और विज्ञान का अनूठा संगम
आधुनिक तकनीक के दौर में भी सूर्य घड़ी का मौजूद होना खास महत्व रखता है। यह विद्यार्थियों को बताती है कि बिजली और डिजिटल उपकरणों के बिना भी प्राकृतिक घटनाओं के आधार पर समय का अनुमान लगाया जा सकता है।
कॉलेज परिसर की ये धरोहरें केवल अतीत की यादें नहीं हैं, बल्कि इतिहास, परंपरा और विज्ञान के बीच संबंध को भी दर्शाती हैं। इनके जरिए नई पीढ़ी को ऐतिहासिक विरासत से जुड़ने और पुराने वैज्ञानिक तरीकों को समझने का अवसर मिलता है।
