Friday, October 23, 2026
हरियाणा में निजी बिजली वितरण

हरियाणा में निजी कंपनी को बिजली वितरण लाइसेंस देने पर अनिल विज सख्त, फैसले को आखिरी स्तर तक देंगे चुनौती

गुरुग्राम-नूंह में निजी बिजली वितरण को लेकर विवाद, SIR पर कांग्रेस को अनिल विज का जवाब

चंडीगढ़: हरियाणा के गुरुग्राम और नूंह में निजी कंपनी को बिजली वितरण का लाइसेंस दिए जाने के फैसले पर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। हरियाणा के बिजली मंत्री अनिल विज ने इस फैसले का विरोध करते हुए इसे चुनौती देने की बात कही है। विज ने स्पष्ट किया कि उनका विभाग निजी बिजली वितरण के पक्ष में नहीं है और उसने नियामक आयोग के सामने इस फैसले का लिखित विरोध किया था। अब आयोग के आदेश के बाद सरकार की ओर से अपील करने की तैयारी की जा रही है।

निजी बिजली वितरण के फैसले के खिलाफ अपील करेंगे अनिल विज

हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (HERC) के आदेश के तहत गुरुग्राम और नूंह में बिजली वितरण के लिए एक निजी कंपनी को पैरेलल डिस्ट्रीब्यूशन लाइसेंस दिए जाने का मामला सामने आया है। इस व्यवस्था के तहत निजी कंपनी संबंधित क्षेत्रों में उपभोक्ताओं को बिजली वितरित कर सकेगी। इसे हरियाणा में इस तरह की व्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

बिजली मंत्री अनिल विज ने इस फैसले पर आपत्ति जताते हुए कहा कि वह खुद निजी बिजली वितरण के खिलाफ हैं। उनके विभाग ने भी आयोग के सामने पूरी मजबूती के साथ अपना विरोध दर्ज कराया था। विज ने कहा कि विभाग ने इस मामले में क्या रुख अपनाया था, इससे जुड़े दस्तावेज लिखित रूप में उपलब्ध हैं और कोई भी उन्हें प्राप्त कर सकता है।

विज ने कहा कि नियामक आयोग ने अपना फैसला सुना दिया है, लेकिन उनकी लड़ाई यहीं समाप्त नहीं होगी। वह इस फैसले के खिलाफ अपील करेंगे और मामले को आखिरी स्तर तक लेकर जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि यदि बिजली विभाग के कर्मचारियों के पास इस समस्या का कोई बेहतर समाधान है, तो वे उसे सामने रखें। विभाग उस पर भी विचार करने के लिए तैयार है।

इस मुद्दे पर आगे की रणनीति बनाने के लिए अनिल विज ने अपने कार्यालय में बिजली विभाग के कर्मचारियों के साथ बैठक भी बुलाई। अब देखना होगा कि आयोग के आदेश के खिलाफ अपील में विभाग क्या कानूनी आधार रखता है और इस मामले में आगे क्या निर्णय होता है।

SIR में घुसपैठियों की संख्या पर कांग्रेस को अनिल विज का जवाब

वहीं, SIR यानी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर कांग्रेस की ओर से भाजपा से पूछे गए सवाल पर भी अनिल विज ने प्रतिक्रिया दी। कांग्रेस ने सवाल उठाया था कि भाजपा बताए कि इस प्रक्रिया के तहत उसने कितने घुसपैठियों को पकड़ा है। इस पर विज ने कहा कि इस संबंध में चुनाव आयोग से सवाल पूछा जाना चाहिए, क्योंकि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में आती है।

अनिल विज ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्ष इस समय भटका हुआ नजर आ रहा है और उसकी स्थिति ऐसी है, जैसे रेल पटरी से उतर गई हो। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची में किसी प्रकार की गलती होने पर उसे ठीक करने की जिम्मेदारी भी चुनाव आयोग की है।

विज ने बताया कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान ऐसे मामले सामने आ सकते हैं, जिनमें किसी मतदाता की मृत्यु हो चुकी हो या किसी बेटी की शादी के बाद उसका निवास दूसरे शहर में हो गया हो। ऐसे मामलों में रिकॉर्ड को दुरुस्त करना जरूरी होता है। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया लंबे अंतराल के बाद हो रही है और सामान्य तौर पर पुनरीक्षण के बाद लोगों को अपनी जानकारी ठीक कराने तथा नाम दर्ज करवाने के लिए समय दिया जाता है।

कांग्रेस पर कार्यकर्ताओं को लेकर भी साधा निशाना

अनिल विज ने कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों पर तंज कसते हुए कहा कि यदि राजनीतिक दल मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर सवाल उठा रहे हैं, तो इसका अर्थ यह भी हो सकता है कि उनके पास पर्याप्त कार्यकर्ता नहीं हैं या वे अपनी जिम्मेदारी ठीक से नहीं निभा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं को घर-घर जाकर लोगों को जागरूक करना चाहिए और जिन पात्र मतदाताओं के नाम सूची में नहीं हैं, उन्हें नाम दर्ज करवाने के लिए प्रेरित करना चाहिए। विज ने कहा कि एक व्यक्ति का एक ही वोट होना चाहिए और चुनाव आयोग इस मामले में अपनी जिम्मेदारी निभा रहा है।

निजी बिजली वितरण के फैसले पर कानूनी चुनौती और मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधने के साथ अनिल विज ने दोनों मुद्दों पर अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। अब बिजली वितरण लाइसेंस के खिलाफ प्रस्तावित अपील और SIR को लेकर राजनीतिक बयानबाजी पर आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी।