भिवानी: हरियाणा के भिवानी स्थित नागरिक अस्पताल में नवजात बच्चे की मौत का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। अपने बेटे की मौत के मामले में न्याय की मांग को लेकर पिता कुलदीप अस्पताल परिसर में धरने पर बैठ गए हैं। उन्होंने अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य कर्मियों पर लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए हैं। पिता का कहना है कि यदि उनका बेटा जीवित होता तो आज परिवार धूमधाम से उसकी छठी मनाता, लेकिन अब उन्हें अपने बच्चे को न्याय दिलाने के लिए धरना देना पड़ रहा है।
भिवानी की बैंक कॉलोनी निवासी कुलदीप ने बताया कि उनके बेटे की 16 अक्टूबर को मौत हो गई थी। उनका आरोप है कि अब तक उन्हें बच्चे की मौत के कारणों की स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई और न ही मामले में संतोषजनक कार्रवाई हुई है। उन्होंने कहा कि पुलिस को शिकायत देने के बावजूद उन्हें न्याय नहीं मिला। इसी से परेशान होकर उन्होंने धरना शुरू किया है।
अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही के आरोप
धरने पर बैठे कुलदीप ने आरोप लगाया कि नागरिक अस्पताल में सुविधाओं के नाम पर मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी को अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए निजी केंद्र पर भेजा गया था, लेकिन वहां जाने के लिए एंबुलेंस या अन्य सहायता उपलब्ध नहीं कराई गई। कुलदीप का आरोप है कि उनकी पत्नी को समय पर डिलीवरी रूम में भी नहीं ले जाया गया और प्रसव के दौरान डॉक्टरों तथा नर्सिंग स्टाफ ने उचित देखभाल नहीं की।
कुलदीप ने कहा कि उनके परिवार में पहले से तीन बेटियां हैं और चौथे बच्चे के रूप में बेटे का जन्म हुआ था। परिवार को बेटे के जन्म से काफी उम्मीदें थीं, लेकिन उसकी मौत से वे टूट गए हैं। उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि किसी डॉक्टर, कर्मचारी या अधिकारी की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
पुलिस में शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं होने का आरोप
कुलदीप के अनुसार, उन्होंने मामले की शिकायत पुलिस को दी थी और उन्हें पहले बच्चे का पोस्टमार्टम करवाने के लिए कहा गया था। उनका आरोप है कि अब तक उन्हें पोस्टमार्टम रिपोर्ट और बच्चे की मौत के कारणों के संबंध में स्पष्ट जानकारी नहीं मिली है।
उन्होंने कहा कि उनका धरना केवल अपने परिवार को न्याय दिलाने के लिए नहीं है, बल्कि वे चाहते हैं कि भविष्य में किसी दूसरे परिवार को ऐसी परिस्थिति का सामना न करना पड़े। उन्होंने अस्पताल में मरीजों और गर्भवती महिलाओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करवाने की भी मांग की।
सामाजिक संगठनों ने भी उठाई कार्रवाई की मांग
मामले में भिवानी गौ रक्षा दल के प्रधान संजय परमार और कामरेड ओमप्रकाश ने भी कुलदीप का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि यदि नवजात की मौत के मामले में किसी भी स्तर पर लापरवाही हुई है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
उन्होंने सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि भिवानी में मेडिकल कॉलेज शुरू करने की बातें की जा रही हैं, लेकिन नागरिक अस्पताल में उपचार के लिए आने वाले मरीजों को पर्याप्त सुविधाएं मिलनी चाहिए। उनका आरोप है कि कई मरीजों को बेहतर उपचार के लिए रोहतक पीजीआई रेफर करना पड़ता है। उन्होंने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग की।
CMO बोले- दोषी पाए जाने पर होगी प्रशासनिक कार्रवाई
वहीं, भिवानी के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. रघुवीर शांडिल्य ने कहा कि बच्चे की मौत की सूचना पुलिस को दी गई है। पुलिस से संबंधित जानकारी मिलने के बाद मामले में जो भी कर्मचारी या अधिकारी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।
CMO ने बताया कि बच्चे का पोस्टमार्टम हो चुका है। निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार पोस्टमार्टम के बाद शव और रिपोर्ट पुलिस को सौंप दी जाती है। उन्होंने कहा कि संबंधित परिवार भी नियमानुसार पोस्टमार्टम रिपोर्ट प्राप्त कर सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि परिवार की जायज मांगों पर विचार किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर दूसरी जगह से पोस्टमार्टम करवाने का विकल्प भी देखा जा सकता है।
डॉ. रघुवीर शांडिल्य ने परिवार से अस्पताल परिसर में धरना-प्रदर्शन नहीं करने का अनुरोध किया। फिलहाल, नवजात की मौत के मामले में परिवार ने निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग उठाई है। अब जांच में सामने आने वाले तथ्यों और प्रशासन की कार्रवाई पर सबकी नजर रहेगी।
