Friday, October 23, 2026
पलवल ब्राह्मण समाज महापंचायत

पलवल में ब्राह्मण समाज की महापंचायत, दहेज-मृत्यु भोज पर रोक; 51 बारातियों समेत कई फैसले

पलवल: सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ पलवल में ब्राह्मण समाज ने महापंचायत आयोजित कर कई अहम फैसले लिए। ब्राह्मण धर्मशाला में हुई महापंचायत में जिलेभर से बड़ी संख्या में समाज के लोग पहुंचे। पंचायत में दहेज प्रथा, नशाखोरी, फिजूलखर्ची और मृत्यु भोज जैसी सामाजिक कुरीतियों को खत्म करने का संकल्प लिया गया। महापंचायत की अध्यक्षता ब्राह्मण सभा के जिला अध्यक्ष विनोद शर्मा ने की।

दहेज लेने और देने पर पूरी तरह रोक

महापंचायत में शादी-विवाह के दौरान दहेज लेने और देने पर पूरी तरह रोक लगाने का फैसला किया गया। समाज की ओर से शादी समारोहों में होने वाली अनावश्यक फिजूलखर्ची और दिखावे को कम करने के लिए अलग-अलग रस्मों में लेन-देन और लोगों की संख्या भी निर्धारित की गई।

तय किया गया कि सगाई में केवल एक रुपया और पांच जोड़ी कपड़े दिए जाएंगे और इसमें अधिकतम पांच लोग शामिल होंगे। गोद भराई में भी पांच लोग जाएंगे तथा एक जोड़ी कपड़े, सोने की अंगूठी और 101 रुपये देने का प्रावधान रखा गया है।

लगन और भात की रस्म के लिए भी तय किए नियम

महापंचायत में लगन की रस्म के लिए केवल एक व्यक्ति जाने और एक रुपया देने का फैसला किया गया। वहीं भात न्योतने के लिए अधिकतम 11 महिलाएं जाएंगी।

भात में 11 पुरुष शामिल होंगे। इसमें एक तोला सोना, कपड़े और 2100 रुपये देने का प्रावधान तय किया गया है। इन फैसलों का उद्देश्य शादी-विवाह के दौरान होने वाले अतिरिक्त खर्च को सीमित करना बताया गया।

बारात में सिर्फ 51 बाराती, भोजन रहेगा शाकाहारी

महापंचायत में बारात को लेकर भी महत्वपूर्ण फैसला लिया गया। इसके मुताबिक बारात में अधिकतम 51 बाराती ही शामिल हो सकेंगे और भोजन शाकाहारी रखने का निर्णय लिया गया।

लड़की पक्ष की ओर से दो तोले सोने के गहने, 100 ग्राम चांदी, 11 जोड़ी कपड़े, संदूक या अलमारी और बेड देने का प्रावधान रखा गया है। संबंधित रिपोर्टों में भी 51 बारातियों की सीमा और शाकाहारी भोजन के फैसले की पुष्टि हुई है।

शादी में नशे और डीजे पर भी रोक

महापंचायत में शादी समारोहों के दौरान नशे पर पूरी तरह रोक लगाने का फैसला किया गया। इसके साथ ही डीजे और तेज संगीत पर भी पाबंदी रखने का निर्णय लिया गया।

समाज के लोगों ने नशे के खिलाफ अभियान चलाने और युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए सामूहिक प्रयास करने की बात कही। ताजा रिपोर्टों में भी नशे और डीजे पर रोक तथा नशे के खिलाफ अभियान चलाने का उल्लेख है।

मृत्यु भोज पूरी तरह बंद करने का फैसला

महापंचायत में मृत्यु भोज को भी पूरी तरह बंद करने का निर्णय लिया गया। समाज की ओर से कहा गया कि ऐसे आयोजनों से परिवारों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ पड़ता है, इसलिए इसे समाप्त करने का फैसला किया गया है।

इसके अलावा बरीपुरी और मिलनी में भी खर्च सीमित रखने के लिए नियम तय किए गए हैं। महापंचायत में सामाजिक कार्यक्रमों को सादगी से आयोजित करने पर जोर दिया गया।

बच्चों की शिक्षा के लिए गांव-गांव बनेंगी कमेटियां

महापंचायत में बच्चों की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए गांव-गांव कमेटियां बनाने का निर्णय भी लिया गया। समाज के लोगों ने शिक्षा को सामाजिक विकास का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए बच्चों को शिक्षित करने और परिवारों को शिक्षा के प्रति जागरूक करने पर जोर दिया।

शराब के ठेके बंद कराने की मांग उठेगी

महापंचायत में गांवों में खुले शराब के ठेकों को बंद कराने के लिए सरकार और जिला प्रशासन के सामने मांग रखने का भी निर्णय लिया गया। समाज के लोगों ने नशे के खिलाफ अभियान को आगे बढ़ाने और इसके लिए सामूहिक स्तर पर काम करने की बात कही।

नियम नहीं मानने वालों के सामाजिक बहिष्कार का फैसला

महापंचायत में यह भी तय किया गया कि समाज द्वारा निर्धारित नियमों का पालन नहीं करने वाले लोगों के सामाजिक कार्यक्रमों का ग्रामीणों और रिश्तेदारों की ओर से बहिष्कार किया जाएगा। इस फैसले का उद्देश्य महापंचायत में लिए गए निर्णयों के पालन को सुनिश्चित करना बताया गया है। ऐसी कार्रवाई के निर्णय का उल्लेख अन्य प्रकाशित रिपोर्टों में भी किया गया है।

दहेज, नशा और फिजूलखर्ची खत्म करने पर जोर

पलवल की इस महापंचायत का मुख्य संदेश सामाजिक कुरीतियों को कम करने और समाज में सादगी को बढ़ावा देने का रहा। दहेज प्रथा, नशाखोरी, फिजूलखर्ची और मृत्यु भोज पर रोक के साथ शिक्षा को बढ़ावा देने के फैसले लिए गए।

महापंचायत में समाज के लोगों ने इन फैसलों को लागू करने के लिए सामूहिक भागीदारी की आवश्यकता जताई।