अंबाला: अंबाला छावनी की अनाज मंडी में धान की आवक बढ़ने के साथ किसानों की परेशानियां भी बढ़ती जा रही हैं। किसानों का आरोप है कि ‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ पोर्टल पर सत्यापन नहीं होने के कारण गेट पास नहीं कट रहे, जिसके चलते उन्हें मंडी और संबंधित विभागों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। वहीं विभागीय स्तर पर पोर्टल की तकनीकी समस्या का हवाला दिया जा रहा है।
मंडी में धान की आवक बढ़ी, खरीद और उठान को लेकर चिंता
किसानों के अनुसार अंबाला कैंट की अनाज मंडी में करीब 1 लाख 80 हजार क्विंटल धान की आवक हो चुकी है, जबकि खरीद और उठान की रफ्तार अपेक्षाकृत कम है। मंडी में जगह की समस्या के कारण कई किसान अपनी धान की ढेरियां मंडी परिसर और आसपास की सड़कों पर लगाने को मजबूर हैं।
ताजा रिपोर्टों में भी अंबाला कैंट की नई अनाज मंडी में धान उतारने और सुखाने के लिए जगह की कमी तथा ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की कतार की समस्या सामने आई है।
पोर्टल पर सत्यापन नहीं होने से गेट पास अटके
किसानों का कहना है कि उन्होंने समय रहते ‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ पोर्टल पर पंजीकरण करवाया था, लेकिन सत्यापन समय पर नहीं हो पाया। किसानों के मुताबिक पोर्टल कुछ समय के लिए दोबारा खोला गया था, लेकिन तकनीकी दिक्कत और साइट की धीमी रफ्तार के कारण कई किसानों का डाटा अपलोड नहीं हो सका।
किसानों का आरोप है कि जब वे गेट पास के लिए मंडी पहुंचते हैं तो कई बार घंटों इंतजार करने के बाद उन्हें पोर्टल नहीं चलने या सत्यापन लंबित होने की जानकारी दी जाती है। इससे उनकी फसल मंडी में ही पड़ी रह जाती है।
हरियाणा में धान खरीद व्यवस्था में ‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ और ई-खरीद पोर्टल का इस्तेमाल किया जा रहा है। सरकार ने धान की आवक के लिए ई-खरीद पोर्टल के जरिए गेट पास जारी करने की व्यवस्था शुरू की है।
तीन-चार दिन से ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में डेरा
किसानों का कहना है कि कई किसान पिछले तीन-चार दिनों से धान से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ मंडी में डेरा डाले हुए हैं। उनका कहना है कि यदि खरीद और उठान समय पर हो जाए तो मंडी में फसल रखने के लिए जगह बन सकती है।
किसानों को सबसे ज्यादा चिंता मौसम खराब होने की है। खुले आसमान के नीचे पड़ी धान की फसल बारिश में भीगती है तो इससे किसान और आढ़ती दोनों को नुकसान होने की आशंका है।
26 क्विंटल प्रति एकड़ की सीमा पर भी सवाल
किसानों ने सरकार की ओर से तय खरीद सीमा को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि एक एकड़ में निर्धारित सीमा से ज्यादा धान की पैदावार होती है तो अतिरिक्त फसल की खरीद कौन करेगा।
अंबाला कैंट मंडी में किसानों की ओर से खरीद सीमा बढ़ाने की मांग पहले भी उठ चुकी है। किसानों के एक संगठन ने सीमा को 32 क्विंटल प्रति एकड़ करने की मांग की थी।
मंडी सचिव बोले- पोर्टल में दिक्कत वाले किसानों का मैनुअल रजिस्ट्रेशन
वहीं मार्केट कमेटी के सचिव नीरज भारद्वाज का कहना है कि मंडी में धान की लगातार आवक हो रही है और किसानों को किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए गेट पास जारी करने का काम जारी है।
सचिव के अनुसार, जिन किसानों ने ‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ पोर्टल पर पंजीकरण कराया है, लेकिन पोर्टल में तकनीकी दिक्कत के कारण समस्या आ रही है, उनका मैनुअल रजिस्ट्रेशन भी किया जा रहा है।
हालिया रिपोर्ट में भी मंडी सचिव ने बताया था कि MFMB से ई-पोर्टल पर डाटा ट्रांसफर होने में एक-दो दिन लग सकते हैं।
सचिव ने किसानों से की धान सुखाकर लाने की अपील
मंडी सचिव नीरज भारद्वाज ने किसानों से अपील की है कि वे मंडी में धान लेकर आने से पहले फसल को अच्छी तरह सुखाकर लाएं, ताकि नमी के कारण खरीद प्रक्रिया में देरी न हो।
धान खरीद के दौरान नमी भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। अंबाला में अधिकारियों ने पहले भी निर्धारित नमी मानक के अनुरूप धान की खरीद और समय पर उठान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
मौसम खराब हुआ तो बढ़ सकती है किसानों की परेशानी
फिलहाल मंडी में किसानों की सबसे बड़ी चिंता यही है कि अगर बारिश हुई तो खुले में पड़ी धान की फसल को नुकसान हो सकता है। किसान चाहते हैं कि सत्यापन और गेट पास की समस्या जल्द दूर हो, खरीद की रफ्तार बढ़ाई जाए और खरीदी गई फसल का समय पर उठान कराया जाए।
वहीं प्रशासन और मार्केट कमेटी के सामने मंडी में बढ़ती आवक के बीच जगह बनाए रखने और खरीद-उठान प्रक्रिया को तेज करने की चुनौती है।
