Saturday, October 31, 2026
अहोई माता के व्रत को लेकर बाजार में बिक्री के लिए रखे गए गन्ने।

अहोई अष्टमी को लेकर बाजारों में रौनक, गन्ने और सिंघाड़े की खरीदारी कर रहीं महिलाएं

अंबाला: अहोई अष्टमी के व्रत को लेकर बाजारों में तैयारियां शुरू हो गई हैं। बेटों की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना के लिए रखे जाने वाले इस व्रत को लेकर महिलाएं पूजा का सामान खरीद रही हैं। बाजारों में खास तौर पर गन्ने और सिंघाड़े की मांग देखने को मिल रही है। महिलाएं व्रत के लिए गन्ने, सिंघाड़े और मिठाइयों की खरीदारी कर रही हैं।

करवा चौथ की तरह रखा जाता है अहोई माता का व्रत

महिलाओं ने बताया कि अहोई माता का व्रत भी करवा चौथ की तरह पूरे दिन उपवास रखकर किया जाता है। हालांकि, दोनों व्रतों को खोलने के समय में अंतर है। करवा चौथ का व्रत चंद्रमा के दर्शन के बाद खोला जाता है, जबकि अहोई अष्टमी का व्रत तारों के दर्शन के बाद खोला जाता है।

महिलाओं के अनुसार, इस व्रत में पूरे दिन बिना कुछ खाए-पिए रहने की परंपरा है। पूजा में गन्ने और सिंघाड़े का विशेष महत्व होता है। इसके साथ मिठाई और अन्य पूजा सामग्री भी रखी जाती है।

बाजारों में गन्ने और सिंघाड़े की खरीदारी

अहोई माता के व्रत को देखते हुए बाजारों में गन्ने की दुकानें सज गई हैं। दुकानदारों ने व्रत के लिए गन्ने के ढेर लगाए हैं, जिन्हें महिलाएं खरीदकर घर ले जा रही हैं। इसके अलावा सिंघाड़े और मिठाइयों की भी खरीदारी की जा रही है।

खरीदारी करने पहुंची महिलाओं ने बताया कि वे अगले दिन अहोई माता का व्रत रखेंगी। इसके लिए पूजा से जुड़ी जरूरी सामग्री जुटाई जा रही है।

ज्योतिषाचार्य ने बताया व्रत का महत्व और पूजा की परंपरा

ज्योतिषाचार्य के अनुसार, अहोई माता के व्रत में सुबह तारों की छांव में उठकर भोजन करने की परंपरा बताई जाती है। कुछ महिलाएं दोपहर करीब 3 बजे कथा करने के बाद फलाहार भी कर सकती हैं, जबकि ज्यादातर महिलाएं रात को तारों के दर्शन करने के बाद ही भोजन करती हैं।

ज्योतिषाचार्य ने बताया कि यह व्रत मुख्य रूप से बेटों की लंबी आयु और अच्छे स्वास्थ्य की कामना के लिए रखा जाता है। इस दौरान अहोई माता की पूजा और व्रत कथा का विशेष महत्व होता है। उन्होंने महाभारत से जुड़ी एक कथा का भी उल्लेख किया, जिसे अहोई माता के व्रत के संदर्भ में सुनाया जाता है।