चंडीगढ़। किसान मजदूर मोर्चा (KMM) ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील, शंभू बॉर्डर पर हुए नुकसान और मानसून से पहले बांधों की स्थिति को लेकर बड़ा आंदोलन छेड़ने का ऐलान किया है। संगठन की बैठक में विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करते हुए केंद्र और पंजाब सरकार के खिलाफ संघर्ष तेज करने का फैसला लिया गया।
भारत-अमेरिका ट्रेड डील से खेती और डेयरी सेक्टर को नुकसान का दावा
किसान नेता दिलबाग सिंह हरिगढ़ ने बैठक के बाद कहा कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर किसान संगठनों में भारी चिंता है। उनका आरोप है कि यदि यह समझौता लागू होता है तो देश के कृषि और डेयरी क्षेत्र को भारी नुकसान होगा।
उन्होंने कहा कि केंद्र और पंजाब सरकार कॉरपोरेट हितों को बढ़ावा देने तथा सरकारी खरीद से बचने के लिए ऐसे फैसले ले रही हैं। इसी के विरोध में 23 और 24 जून को दिल्ली में बैठक आयोजित की जाएगी, जबकि 24 जून को भाजपा कार्यालयों के बाहर प्रदर्शन भी किए जाएंगे।
25 जून को किसान भवन में होगी अहम बैठक
दिलबाग सिंह ने बताया कि किसान नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी द्वारा लिखे गए पत्र के आधार पर 25 जून को किसान भवन में एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है। किसान मजदूर मोर्चा इस बैठक में शामिल होगा और वहां लिए जाने वाले निर्णयों पर आगे की रणनीति तय की जाएगी।
शंभू-खनौरी बॉर्डर पर नुकसान का मुआवजा नहीं मिलने पर रोष
किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि शंभू और खनौरी बॉर्डर पर आंदोलन के दौरान किसानों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ, लेकिन अब तक करीब 3 करोड़ 77 लाख रुपये का मुआवजा नहीं दिया गया है।
इसको लेकर 30 जुलाई को पूरे पंजाब में मुख्यमंत्री भगवंत मान के खिलाफ बड़े स्तर पर फ्लेक्स और पोस्टर लगाने का निर्णय लिया गया है। किसानों का कहना है कि सरकार से उनका सामान वापस करने और नुकसान की भरपाई की मांग की जाएगी।
बांधों की स्थिति पर जताई चिंता, केंद्र को दी चेतावनी
किसान नेता सुखविंदर कौर ने कहा कि मानसून से पहले डैमों की पर्याप्त डी-सिल्टिंग नहीं की गई है, जिससे बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि बांधों के प्रबंधन में केंद्र सरकार की भूमिका बढ़ने के बाद जिम्मेदारी भी उसी की बनती है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि गलत फैसलों या लापरवाही के कारण इस बार बाढ़ आती है, तो किसान संगठन केंद्र सरकार के खिलाफ व्यापक आंदोलन छेड़ेंगे।
27 जून को लुधियाना में होगी KMM की बैठक
किसान मजदूर मोर्चा ने 27 जून को लुधियाना में बैठक बुलाने का फैसला लिया है। इस बैठक में उन पांच प्रतिनिधियों की रिपोर्ट पर चर्चा होगी, जो गुरनाम सिंह चढ़ूनी के साथ आगामी वार्ता में शामिल होंगे।
किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने कहा कि उन्होंने स्वयं बांधों का दौरा किया है, लेकिन तैयारियां पर्याप्त नजर नहीं आ रही हैं। उन्होंने कहा कि मानसून के दौरान बाढ़ का खतरा बना हुआ है और इसके लिए केंद्र तथा राज्य सरकार दोनों जिम्मेदार होंगी।
