यमुनानगर। भविष्य के वन अधिकारियों को उद्योग और पर्यावरण के बीच बेहतर समन्वय की समझ विकसित करने के उद्देश्य से इंडियन फॉरेस्ट सर्विस (आईएफएस) प्रोबेशनर्स का 132 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल यमुनानगर पहुंचा। जम्मू-कश्मीर, लेह-लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, पंजाब और हरियाणा के विभिन्न क्षेत्रों का दौरा कर चुके अधिकारियों ने यहां की वुड बेस्ड और एग्रो इंडस्ट्री का अध्ययन किया।
दौरे के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने यमुनानगर स्थित सागर वुड प्रोडक्ट इंडस्ट्री का भ्रमण किया और प्लाईवुड निर्माण प्रक्रिया को नजदीक से देखा। प्रतिनिधिमंडल का स्वागत उद्योग संचालकों एवं वन विभाग के अधिकारियों ने किया।
उद्योग के संचालक गौरव चौपाल ने अधिकारियों को प्लाईवुड निर्माण, पॉपुलर आधारित उद्योग, कच्चे माल की उपलब्धता तथा उद्योग से जुड़े रोजगार के अवसरों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि एग्रो फॉरेस्ट्री मॉडल किसानों और उद्योग दोनों के लिए लाभकारी साबित हो रहा है।
इस अवसर पर संदीप सैनी तथा वन विभाग के पूर्व संयुक्त निदेशक राजीव गुलिया ने कहा कि प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत अधिकारियों को देश के विभिन्न राज्यों की वन संपदा, पर्यावरणीय चुनौतियों और उद्योगों की कार्यप्रणाली से अवगत कराया जा रहा है। इसका उद्देश्य उन्हें भविष्य में विभिन्न क्षेत्रों में नियुक्ति के दौरान स्थानीय परिस्थितियों और आवश्यकताओं को बेहतर ढंग से समझने के लिए तैयार करना है।
प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने उद्योग में प्रयुक्त रॉ मैटेरियल, उत्पादन प्रक्रिया तथा एग्रो फॉरेस्ट्री मॉडल की विस्तार से जानकारी प्राप्त की। साथ ही उन्होंने पर्यावरण संरक्षण और औद्योगिक विकास के बीच संतुलन बनाए रखने से जुड़े विभिन्न पहलुओं का भी अध्ययन किया।
25 दिवसीय अध्ययन दौरे के अंतिम चरण में यमुनानगर पहुंचे अधिकारियों ने यहां के वुड इंडस्ट्री मॉडल को उपयोगी और व्यावहारिक बताया। अधिकारियों ने उद्योग का निरीक्षण करने के साथ-साथ वरिष्ठ वन अधिकारियों के अनुभवों को भी सुना और उनसे वन प्रबंधन एवं उद्योग संबंधी महत्वपूर्ण जानकारियां हासिल कीं।
