उज्ज्वल दिशा@अम्बाला। अंबाला में कानून की धज्जियां उड़ाने का एक ऐसा सिलसिला शुरू हुआ है जो रुकने का नाम नहीं ले रहा। सरकारी फाइलों में जो रास्ता ‘शून्य’ है, धरातल पर वहां आलीशान इमारतों के लिए रेड कारपेट बिछाया जा रहा है। पहले ‘जग्गी सिटी सेंटर’ के अवैध निर्माण और जमीन के रिकॉर्ड में हुई हेराफेरी ने प्रशासन की साख पर सवाल खड़े किए थे, लेकिन अब उसी पटकथा का दूसरा अध्याय मंजी साहिब गुरुद्वारा के ठीक सामने लिखा जा रहा है। यह किसी फिल्म से कम नहीं है, इसे आप ‘खोसला का घोसला – पार्ट 2’ कह सकते हैं, जहाँ नियम रसूखदारों की जेब में हैं और नोटिस सरकारी दफ्तरों की धूल फांक रहे हैं।
RTI का बड़ा खुलासा: हाईवे पर रास्ता ही नहीं, फिर भी बना दिया डिवाइडर
इस पूरे मामले की जड़ में है राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की एक RTI रिपोर्ट। सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। NHAI ने लिखित रूप में स्वीकार किया है कि मंजी साहिब गुरुद्वारा के सामने निर्माणाधीन इस विवादित साइट को नेशनल हाईवे से किसी भी तरह के रास्ते की अनुमति (Access Permission) नहीं दी गई है।
नियम कहते हैं कि बिना NHAI की अनुमति के हाईवे के स्लिप रोड या मुख्य मार्ग से कोई भी निजी रास्ता नहीं जोड़ा जा सकता। लेकिन धरातल पर हकीकत इसके उलट है। यहाँ न केवल रास्ता बनाया जा रहा है, बल्कि स्लिप रोड को छोटा करके खास तौर पर डिवाइडर खड़े कर दिए गए हैं ताकि एक विशिष्ट प्रॉपर्टी डीलर की जमीन को सीधा फायदा पहुँचाया जा सके। यह सीधा-सीधा सरकारी जमीन पर अतिक्रमण और सार्वजनिक सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है।
फॉरेस्ट विभाग के तीन नोटिस: रसूख के आगे बेअसर ‘कागजी शेर’
सिर्फ हाईवे ही नहीं, बल्कि वन विभाग (Forest Department) के नियमों को भी यहाँ ठेंगे पर रखा गया है। सूत्रों के अनुसार, वन विभाग इस जमीन के मालिकों को अब तक लगभग तीन नोटिस जारी कर चुका है। नोटिस में स्पष्ट तौर पर जमीन का CLU (Change of Land Use) और NHAI की NOC प्रस्तुत करने को कहा गया है।
हैरानी की बात यह है कि तीन-तीन नोटिस मिलने के बावजूद निर्माण कार्य एक दिन के लिए भी नहीं रुका। वन विभाग के अधिकारी कागजों पर नोटिस की खानापूर्ति कर रहे हैं, जबकि मौके पर बुलडोजर और मज़दूर कानून की छाती पर मूंग दल रहे हैं। सवाल यह उठता है कि क्या वन विभाग सिर्फ छोटे किसानों या आम नागरिकों के पेड़ों पर कुल्हाड़ी चलाने के लिए है? रसूखदारों के इस अवैध ‘घोसले’ पर विभाग के हाथ क्यों कांप रहे हैं?
बिना अनुमति के ‘अवैध साम्राज्य’ का निर्माण
NHAI और अन्य विभागों से मिली सूचनाओं को जोड़कर देखा जाए तो एक डरावनी तस्वीर साफ होती है। इस विवादित स्थल के मालिकों के पास निर्माण के लिए आवश्यक किसी भी विभाग की कोई वैध अनुमति मौजूद नहीं है:
NHAI की NOC नदारद: हाईवे से जुड़ने का कोई कानूनी अधिकार नहीं।
CLU पर सस्पेंस: कृषि योग्य या अन्य श्रेणी की जमीन को व्यावसायिक इस्तेमाल में लाने का कोई पुख्ता दस्तावेज नहीं।
नक्शा और अनुमति: जब प्राथमिक एनओसी ही नहीं है, तो बिल्डिंग का नक्शा पास होना नामुमकिन है।
इसके बावजूद, दिन-रात चलते काम ने यह साबित कर दिया है कि अंबाला के कुछ भ्रष्ट अधिकारियों का वरदहस्त इन भू-माफियाओं पर बना हुआ है।
जनता की सुरक्षा दांव पर: हादसों को खुला न्योता
मंजी साहिब गुरुद्वारा के पास जिस तरह से स्लिप रोड को संकरा किया गया है और अवैध डिवाइडर बनाए गए हैं, वह आने वाले समय में एक बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं। नेशनल हाईवे पर वाहनों की गति अधिक होती है, ऐसे में बिना किसी तकनीकी योजना और अनुमति के बनाए गए ये मोड़ और डिवाइडर ‘ब्लैक स्पॉट’ साबित होंगे। क्या प्रशासन किसी मासूम की जान जाने का इंतज़ार कर रहा है? क्या एक प्रॉपर्टी डीलर के मुनाफे की कीमत अंबाला की जनता अपने खून से चुकाएगी?
जग्गी सिटी सेंटर से मंजी साहिब तक: एक ही पैटर्न
यह पहली बार नहीं है। इससे पहले जग्गी सिटी सेंटर के मामले में भी यही पैटर्न देखा गया था। बिना आज्ञा जमीन का रिकॉर्ड बदल दिया गया, अवैध निर्माण खड़ा हो गया और प्रशासन ‘मूकदर्शक’ बना रहा। अब मंजी साहिब के सामने वही कहानी दोहराई जा रही है। ऐसा लगता है कि अंबाला में ‘खोसला का घोसला’ की एक पूरी सीरीज चल रही है, जहाँ भ्रष्ट अधिकारी निर्माता-निर्देशक की भूमिका में हैं।
अधिकारियों की रहस्यमयी चुप्पी
जब इस विषय पर संबंधित विभागों के अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो अधिकांश ने ‘मामला संज्ञान में होने’ की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया। NHAI के अधिकारी फाइलें खंगालने की बात कह रहे हैं, तो वन विभाग ‘अगली कार्रवाई’ का आश्वासन दे रहा है। लेकिन यह ‘अगली कार्रवाई’ कब होगी? क्या तब, जब इमारत पूरी तरह बनकर तैयार हो जाएगी और मामला कोर्ट की तारीखों में उलझ जाएगा?
जब NHAI ने रास्ता नहीं दिया, तो सड़क के बीचों-बीच डिवाइडर बनाने की हिम्मत किसने की?
वन विभाग के तीन नोटिसों को कचरे के डिब्बे में डालने वाले रसूखदारों पर FIR क्यों नहीं हुई?
क्या अंबाला का जिला प्रशासन इन अवैध निर्माणों के आगे आत्मसमर्पण कर चुका है?
RTI में खुलासा होने के बाद भी विजलेंस विभाग इस मामले की जांच क्यों नहीं कर रहा?
मंजी साहिब गुरुद्वारा के सामने खड़ा होता यह अवैध ढांचा केवल ईंट-पत्थर की दीवार नहीं है, बल्कि यह हमारे सिस्टम के खोखलेपन का स्मारक है। यह साबित करता है कि अगर आपकी जेब में पैसा और हाथ में रसूख है, तो आप देश के नेशनल हाईवे का नक्शा भी अपनी मर्जी से बदलवा सकते हैं। ‘उज्जवल दिशा’ इस महा-घोटाले की हर परत को उधेड़ना जारी रखेगा। जनता की अदालत में अब फैसला होना बाकी है कि क्या अंबाला में कानून का राज चलेगा या फिर ये ‘खोसला का घोसला’ ऐसे ही फलते-फूलते रहेंगे।
