अंबाला छावनी: अंबाला छावनी के कई प्रतिष्ठित स्कूलों को एक बार फिर ई-मेल के जरिए बम से उड़ाने की धमकी दी गई है। इस थ्रेट मेल के बाद जहां स्कूल परिसरों में हड़कंप मच गया, वहीं पुलिस प्रशासन भी तुरंत एक्शन मोड में आ गया। हालांकि, शुरुआती जांच में कुछ भी संदिग्ध नहीं मिला है, लेकिन सुरक्षा के लिहाज से स्कूलों और पुलिस ने ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाते हुए अलर्ट जारी कर दिया है।
सिसिल कॉन्वेंट स्कूल में पहुंची पुलिस, चप्पे-चप्पे की तलाशी
अंबाला कैंट स्थित सिसिल कॉन्वेंट स्कूल की प्रिंसिपल डॉ. शिवानी शर्मा ने बताया कि आज सुबह उन्हें एक धमकी भरा ई-मेल प्राप्त हुआ। मेल मिलते ही बिना देरी किए पुलिस को सूचित किया गया। डॉ. शर्मा के अनुसार:
“हमने इस मामले को बहुत गंभीरता से लिया है। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर ई-मेल की तकनीकी जांच की और पूरे स्कूल परिसर को बारीकी से खंगाला। हमने पेरेंट्स को भी अलर्ट किया है कि वे बच्चों की सुरक्षा को लेकर सतर्क रहें और किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ बच्चे को न भेजें।”
प्रिंसिपल ने यह भी बताया कि ई-मेल की भाषा और तरीका वैसा ही है जैसा पिछले दिनों हरियाणा के अन्य स्कूलों को मिली धमकियों में देखा गया था।
पुलिस का ‘सर्च ऑपरेशन’ और बच्चों को ढांढस
धमकी की सूचना मिलते ही सदर थाना अंबाला कैंट के SHO धर्मवीर अपनी टीम के साथ स्कूलों में पहुंचे। पुलिस ने न केवल सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया, बल्कि क्लासरूम में जाकर बच्चों से बातचीत की और उनका हौसला बढ़ाया ताकि उनमें किसी तरह का डर न रहे।
SHO धर्मवीर ने बताया:
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पुलिस को जैसे ही स्कूलों से सूचना मिली, तुरंत टीमें मौके पर भेजी गईं।
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ई-मेल के सोर्स (आईपीएस एड्रेस) का पता लगाने के लिए साइबर सेल की मदद ली जा रही है।
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स्कूल के प्रवेश द्वारों और आसपास के इलाकों में गश्त बढ़ा दी गई है।
बार-बार मिल रही धमकियों से दहशत का माहौल
गौरतलब है कि यह पहला मौका नहीं है जब अंबाला के स्कूलों को इस तरह का थ्रेट मेल मिला हो। इससे पहले भी शहर और हरियाणा के कई अन्य जिलों में स्कूलों को निशाना बनाकर ऐसी फर्जी (Hoax) कॉल या मेल किए जा चुके हैं। हालांकि अभी तक किसी भी स्कूल में कोई अप्रिय घटना नहीं घटी है, लेकिन पुलिस इसे शरारत मानकर हल्के में लेने को तैयार नहीं है।
अभिभावकों के लिए गाइडलाइन: स्कूल प्रशासन ने पेरेंट्स से अपील की है कि वे घबराएं नहीं बल्कि सतर्क रहें। स्कूल बस और वैन चालकों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे बच्चों को सुरक्षित हाथों में ही सौंपें।
