भिवानी, —
जिले में प्रस्तावित रेलवे परियोजना के तहत 23 एकड़ कृषि भूमि के अधिग्रहण को लेकर किसानों का विरोध तेज हो गया है। मानेहरू और गौरीपुर गांव के किसानों ने मानहेरू रेलवे स्टेशन के पास धरना शुरू कर दिया है और साफ चेतावनी दी है कि जब तक उन्हें उनकी जमीन का न्यायोचित मुआवजा नहीं मिलेगा, वे किसी भी सूरत में अपनी भूमि का कब्जा रेलवे विभाग को नहीं देंगे।
किसानों ने अपनी जमीन पर टेंट लगाकर अनिश्चितकालीन प्रदर्शन शुरू कर दिया है। उनका आरोप है कि रेलवे विभाग उनकी अनुमति के बिना जमीन पर निशानदेही कर रहा है, जो पूरी तरह अवैध है।
निशानदेही पर किसानों का ऐतराज, बताया ‘अवैध कार्रवाई’
प्रदर्शन कर रहे किसानों का कहना है कि रेलवे विभाग ने बिना पूर्व सहमति के उनकी कृषि भूमि पर पोल लगाकर निशानदेही शुरू कर दी है।
किसानों ने इसे जबरन अधिग्रहण की प्रक्रिया करार देते हुए कहा कि यह उनके अधिकारों का उल्लंघन है।
प्रदर्शन स्थल पर मौजूद किसानों ने साफ कहा कि जब तक मुआवजे को लेकर स्पष्ट और संतोषजनक निर्णय नहीं होता, तब तक किसी भी प्रकार की कार्यवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
मुआवजे को लेकर बड़ा विवाद
किसानों का सबसे बड़ा आरोप मुआवजे की राशि को लेकर है। उनका कहना है कि रेलवे विभाग द्वारा प्रस्तावित 33 लाख रुपये प्रति एकड़ का मुआवजा बेहद कम है।
किसानों के अनुसार, वर्तमान बाजार मूल्य लगभग एक करोड़ रुपये प्रति एकड़ है, जबकि विभाग कलेक्टर रेट के आधार पर जमीन अधिग्रहण करना चाहता है।
किसानों ने इसे अन्यायपूर्ण बताते हुए कहा कि यह उनकी आजीविका पर सीधा हमला है।
प्रदर्शनकारी किसानों का कहना है कि कृषि भूमि ही उनका मुख्य साधन है और यदि इसे कम कीमत पर ले लिया गया, तो उनके सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा।
किसानों की चिंता: ‘भविष्य की पीढ़ियों का क्या होगा?’
किसानों ने इस मुद्दे को केवल वर्तमान का नहीं, बल्कि भविष्य का भी सवाल बताया।
उनका कहना है कि आज के समय में युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सीमित हैं। ऐसे में यदि खेती की जमीन भी छिन जाएगी, तो आने वाली पीढ़ियों के सामने जीवनयापन का संकट खड़ा हो जाएगा।
“यह जमीन ही हमारी जीवन रेखा है। अगर इसे भी हमसे छीन लिया गया, तो हम और हमारे बच्चे कहां जाएंगे?”—प्रदर्शन कर रहे एक किसान ने कहा।
प्रदर्शन में स्थानीय नेतृत्व की भागीदारी
धरने में दोनों गांवों के जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की भी सक्रिय भागीदारी देखने को मिली।
मानेहरू के सरपंच प्रदीप कुमार, गौरीपुर के सरपंच पुनीत सांगवान, समाजसेवी सतपाल उर्फ लाला, जिला पार्षद सतबीर सांगा, किसान सभा के जिला प्रधान रामफल देशवाल और उपप्रधान कामरेड ओमप्रकाश सहित कई प्रमुख लोग किसानों के समर्थन में पहुंचे।
सभी ने एक स्वर में किसानों की मांगों को जायज बताते हुए प्रशासन से उचित मुआवजा देने की अपील की।
रेलवे अधिकारियों से सीधी बातचीत
प्रदर्शन की सूचना मिलने पर रेलवे विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे और किसानों से बातचीत की।
हालांकि किसानों ने स्पष्ट कर दिया कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक वे अपनी जमीन का कब्जा नहीं देंगे।
किसानों और अधिकारियों के बीच बातचीत का कोई ठोस निष्कर्ष नहीं निकल सका, जिससे स्थिति अभी भी तनावपूर्ण बनी हुई है।
राजनीतिक स्तर पर भी उठाया जाएगा मुद्दा
किसानों ने इस मुद्दे को राजनीतिक स्तर पर भी उठाने का निर्णय लिया है।
उन्होंने स्थानीय विधायक घनश्याम सर्राफ से मिलने और इस मामले में हस्तक्षेप करने का अनुरोध करने का फैसला लिया है।
इसके अलावा किसान सांसद धर्मबीर से भी मुलाकात कर चुके हैं। सांसद ने किसानों को आश्वासन दिया है कि वे रेलवे मंत्री से बातचीत करवाने का प्रयास करेंगे।
साथ ही किसानों के अनुरोध पर रेलवे विभाग से 15 मई तक कार्य रोकने की बात भी कही गई है।
