अंबाला शहर में नगर निगम चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मियां चरम पर पहुंच गई हैं। जैसे-जैसे मतदान की तारीख नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे पार्षद और मेयर पद के उम्मीदवारों ने अपने प्रचार अभियान को और तेज कर दिया है। उम्मीदवार सुबह से लेकर देर रात तक वार्डों और कॉलोनियों में घर-घर जाकर मतदाताओं से संपर्क साध रहे हैं और अपने पक्ष में समर्थन जुटाने में जुटे हैं।
इस बार के चुनाव में खास बात यह है कि उम्मीदवारों ने सभाओं के साथ-साथ व्यक्तिगत संपर्क को ज्यादा महत्व दिया है। उम्मीदवार अपने समर्थकों के साथ छोटी-छोटी टीमों में निकलकर गली-मोहल्लों में पहुंच रहे हैं, लोगों से सीधे संवाद कर रहे हैं और उनकी समस्याएं सुन रहे हैं। इस दौरान वे अपने विजन और योजनाओं को भी विस्तार से बता रहे हैं।
घर-घर संपर्क अभियान बना चुनाव का मुख्य आधार
नगर निगम चुनाव में इस बार घर-घर संपर्क अभियान सबसे प्रभावी रणनीति बनकर उभरा है। प्रत्याशी मतदाताओं के दरवाजे पर दस्तक देकर उनसे व्यक्तिगत रूप से जुड़ने की कोशिश कर रहे हैं। महिलाएं, बुजुर्ग और युवा मतदाता इस सीधे संवाद को सकारात्मक रूप से ले रहे हैं। कई स्थानों पर उम्मीदवारों को लोगों का अच्छा समर्थन मिल रहा है, वहीं कुछ जगहों पर जनता अपने मुद्दों को लेकर उम्मीदवारों से तीखे सवाल भी पूछ रही है।
उम्मीदवारों का कहना है कि जनता से सीधा संवाद ही चुनाव जीतने का सबसे मजबूत तरीका है। इसी वजह से वे हर मतदाता तक पहुंचने का प्रयास कर रहे हैं। कई प्रत्याशी तो सुबह की सैर पर निकलने वाले लोगों से लेकर शाम को बाजारों में खरीदारी करने वालों तक, हर वर्ग से संपर्क साध रहे हैं।
स्थानीय मुद्दों पर हो रही चर्चा
प्रचार के दौरान स्थानीय मुद्दे सबसे ज्यादा हावी नजर आ रहे हैं। शहर में जलभराव, पेयजल संकट, सफाई व्यवस्था, टूटी सड़कों, स्ट्रीट लाइट की कमी और सीवरेज की समस्याएं प्रमुख चुनावी मुद्दे बने हुए हैं। मतदाता उम्मीदवारों से इन समस्याओं के समाधान को लेकर स्पष्ट जवाब मांग रहे हैं।
कई वार्डों में लोग सफाई व्यवस्था से नाराज नजर आए। वहीं कुछ क्षेत्रों में पीने के पानी की किल्लत को लेकर भी लोगों ने अपनी नाराजगी जताई। उम्मीदवार इन समस्याओं के समाधान का भरोसा दिला रहे हैं और दावा कर रहे हैं कि जीतने के बाद वे प्राथमिकता के आधार पर इन मुद्दों को हल करेंगे।
युवाओं और महिलाओं को साधने की कोशिश
इस बार चुनाव में युवा और महिला मतदाता निर्णायक भूमिका में नजर आ रहे हैं। यही वजह है कि प्रत्याशी इन वर्गों को साधने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। युवा मतदाताओं को रोजगार, खेल सुविधाओं और डिजिटल सुविधाओं का वादा किया जा रहा है, वहीं महिलाओं के लिए सुरक्षा, स्वच्छता और स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के दावे किए जा रहे हैं।
महिला उम्मीदवार भी इस बार सक्रिय भूमिका में दिखाई दे रही हैं। वे महिलाओं के बीच जाकर अपने अनुभव और योजनाओं को साझा कर रही हैं। कई स्थानों पर महिलाओं की बैठकों का आयोजन भी किया जा रहा है, जहां स्थानीय समस्याओं पर खुलकर चर्चा हो रही है।
सोशल मीडिया का भी जमकर इस्तेमाल
घर-घर संपर्क के साथ-साथ सोशल मीडिया भी चुनाव प्रचार का अहम हिस्सा बन गया है। प्रत्याशी फेसबुक, व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म के जरिए अपने अभियान को आगे बढ़ा रहे हैं। वीडियो, पोस्ट और लाइव सत्रों के माध्यम से वे अपनी बात सीधे जनता तक पहुंचा रहे हैं।
युवा वर्ग सोशल मीडिया के जरिए चुनावी गतिविधियों से जुड़ रहा है। प्रत्याशी अपने समर्थकों को डिजिटल माध्यम से भी सक्रिय रखने की कोशिश कर रहे हैं।
प्रचार में दिख रहा जोश, कार्यकर्ता भी सक्रिय
चुनाव प्रचार में प्रत्याशियों के साथ उनके कार्यकर्ताओं का जोश भी देखने लायक है। कार्यकर्ता घर-घर जाकर पर्चे बांट रहे हैं, पोस्टर लगा रहे हैं और मतदाताओं को मतदान के लिए प्रेरित कर रहे हैं। कई जगहों पर नुक्कड़ सभाएं और छोटी बैठकों का आयोजन भी किया जा रहा है।
कार्यकर्ता अपने उम्मीदवार की छवि को मजबूत करने में जुटे हुए हैं और विरोधियों पर भी निशाना साध रहे हैं। हालांकि, चुनाव आयोग के नियमों का पालन करने के निर्देश भी दिए जा रहे हैं ताकि प्रचार शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो सके।
मतदाताओं में बढ़ी जागरूकता
नगर निगम चुनाव को लेकर मतदाताओं में भी इस बार जागरूकता बढ़ी है। लोग अपने क्षेत्र के विकास को ध्यान में रखते हुए उम्मीदवारों का चयन करने की बात कर रहे हैं। कई मतदाता उम्मीदवारों के पिछले कार्यों और उनकी छवि को भी ध्यान में रख रहे हैं।
युवाओं में पहली बार मतदान को लेकर उत्साह देखा जा रहा है। वे चुनाव प्रक्रिया में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की बात कर रहे हैं।
चुनावी मुकाबला हुआ रोचक
मेयर और पार्षद पद के लिए इस बार कई मजबूत उम्मीदवार मैदान में हैं, जिससे मुकाबला रोचक हो गया है। प्रमुख राजनीतिक दलों के साथ-साथ कई निर्दलीय उम्मीदवार भी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। ऐसे में हर सीट पर कांटे की टक्कर देखने को मिल रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार चुनाव में व्यक्तिगत छवि और स्थानीय कामकाज का असर ज्यादा देखने को मिलेगा। पार्टी से ज्यादा उम्मीदवार की लोकप्रियता और उसकी पहुंच चुनाव परिणाम को प्रभावित कर सकती है।
प्रशासन भी अलर्ट मोड पर
चुनाव को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से संपन्न कराने के लिए प्रशासन भी पूरी तरह सतर्क है। आचार संहिता के पालन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।
चुनाव आयोग की ओर से भी लगातार निगरानी रखी जा रही है ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता को रोका जा सके।
