अंबाला कैंट से गुजरने वाली टांगरी नदी की वर्ष 2023 और 2025 की विनाशकारी बाढ़ का खौफ अभी भी लोगों के दिलों में ताजा है। मानसून सीजन नजदीक आते ही नदी किनारे बसे इलाकों के निवासियों की चिंताएं फिर बढ़ने लगी हैं। इसी को लेकर अंबाला के सांसद वरुण चौधरी की अध्यक्षता में टांगरी नदी के पास जलभराव और बाढ़ की समस्या के समाधान की मांग को लेकर प्रदर्शन एवं हस्ताक्षर अभियान चलाया गया।
इस कार्यक्रम में टांगरी नदी से सटे क्षेत्रों के अलावा अंबाला कैंट के विभिन्न इलाकों से बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया। महिलाओं की भी उल्लेखनीय उपस्थिति रही। लोगों ने प्रशासन से समय रहते बाढ़ रोकथाम के ठोस इंतजाम करने की मांग की।
वार्ड नंबर 11 की पार्षद नीलम कश्यप ने कहा कि पिछले वर्षों की बाढ़ ने लोगों को आर्थिक और मानसिक रूप से गहरा नुकसान पहुंचाया था। उन्होंने बताया कि हाल ही में कैबिनेट मंत्री Anil Vij द्वारा चांदपुरा से सरसेहड़ी तक 48 लाख रुपये की लागत से बांध निर्माण की घोषणा की गई है। यदि यह कार्य मानसून से पहले पूरा हो जाता है तो क्षेत्रवासियों को बड़ी राहत मिलेगी। हालांकि उन्होंने आरोप लगाया कि वार्ड से जुड़े विकास कार्यों को लेकर प्रशासन गंभीर नहीं है और हाउस बैठकों में पारित एजेंडों पर भी अमल नहीं हो रहा।
वहीं वार्ड नंबर 23 के पार्षद सुधीर जैसवाल ने कहा कि टांगरी नदी को गहरा करने का कार्य शुरू तो हुआ है, लेकिन इसकी गति बेहद धीमी है। उन्होंने आशंका जताई कि यदि कार्य में तेजी नहीं लाई गई तो मानसून से पहले इसे पूरा कर पाना मुश्किल होगा। उन्होंने नदी में हुए अवैध कब्जों को भी बाढ़ की बड़ी वजह बताते हुए प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की।
स्थानीय निवासियों ने भी अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि कुछ दिन पहले हुई हल्की बारिश में ही शहर के कई हिस्से जलमग्न हो गए थे, जो नालों की समय पर सफाई न होने का परिणाम है। लोगों ने कहा कि यदि समय रहते नदी की खुदाई, बांध निर्माण और अतिक्रमण हटाने जैसे कार्य पूरे नहीं किए गए तो आगामी मानसून में फिर से बाढ़ की भयावह स्थिति पैदा हो सकती है।
प्रदर्शन के दौरान लोगों ने प्रशासन से मांग की कि टांगरी नदी के बहाव को बाधित करने वाले सभी अवैध कब्जों को हटाया जाए और बाढ़ नियंत्रण संबंधी सभी परियोजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर जल्द पूरा किया जाए, ताकि क्षेत्रवासियों को एक बार फिर तबाही का सामना न करना पड़े।
