Saturday, June 13, 2026

UJJWAL DISHA@15 जून को राजगढ़ में बजेगा सायरन, राज्य स्तरीय मेगा मॉक ड्रिल में परखी जाएगी आपदा प्रबंधन की तैयारी

राजगढ़ (सिरमौर): यदि 15 जून को राजगढ़ क्षेत्र में अचानक सायरन की आवाज सुनाई दे और राहत एवं बचाव दल सक्रिय नजर आएं तो घबराने की आवश्यकता नहीं है। यह किसी वास्तविक आपदा की स्थिति नहीं होगी, बल्कि राज्य स्तरीय मेगा मॉक ड्रिल का हिस्सा होगी। इस अभ्यास के माध्यम से प्रशासन बादल फटना, भूकंप और जंगलों में आग जैसी संभावित आपदाओं से निपटने की अपनी तैयारियों और संसाधनों की प्रभावशीलता का परीक्षण करेगा।

प्राकृतिक आपदाओं की बढ़ती चुनौतियों को देखते हुए 15 जून को राजगढ़ में 10वीं राज्य स्तरीय मेगा मॉक ड्रिल आयोजित की जा रही है। यह अभ्यास हिमाचल प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के संयुक्त सहयोग से आयोजित होगा। इसका मुख्य उद्देश्य आपदा की स्थिति में प्रशासन की त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता, विभिन्न विभागों के बीच समन्वय और उपलब्ध संसाधनों की कार्यक्षमता का आकलन करना है।

मेगा मॉक ड्रिल की तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए एसडीएम कार्यालय राजगढ़ में एक समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता राज कुमार ठाकुर ने की। बैठक में राजस्व, स्वास्थ्य, पुलिस, अग्निशमन, लोक निर्माण, जल शक्ति, विद्युत, शिक्षा तथा अन्य विभागों के अधिकारियों ने भाग लिया। इस दौरान आपदा प्रबंधन से जुड़ी व्यवस्थाओं की विस्तृत समीक्षा की गई और सभी विभागों को उनकी जिम्मेदारियां स्पष्ट रूप से सौंप दी गईं।

प्रशासन द्वारा पूर्व में टेबल टॉप एक्सरसाइज भी आयोजित की जा चुकी है। इस अभ्यास में विभिन्न संभावित आपदा परिदृश्यों को सामने रखकर विभागों की भूमिका तय की गई। साथ ही संचार व्यवस्था, राहत एवं बचाव उपकरणों की उपलब्धता, एंबुलेंस सेवाओं, राहत शिविरों की व्यवस्था और इंसिडेंट रिस्पांस सिस्टम की कार्यप्रणाली का परीक्षण किया गया।

15 जून को होने वाली ऑन-फील्ड मॉक ड्रिल के दौरान वास्तविक आपदा जैसी परिस्थितियां तैयार की जाएंगी। सबसे पहले सायरन बजाकर आपातकालीन स्थिति की सूचना दी जाएगी, जिसके बाद राहत एवं बचाव दल सक्रिय होकर प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने, घायलों को प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराने, अस्पतालों तक पहुंचाने, राहत शिविर स्थापित करने तथा आवश्यक सेवाओं को बहाल करने जैसी गतिविधियों का अभ्यास करेंगे।

प्रशासन का मानना है कि इस प्रकार के अभ्यास न केवल आपदा प्रबंधन तंत्र की वास्तविक क्षमता को परखने में सहायक होते हैं, बल्कि कमियों की पहचान कर भविष्य में सुधार की दिशा भी तय करते हैं। इसके साथ ही आम नागरिकों में आपदा के दौरान अपनाई जाने वाली सावधानियों और सुरक्षा उपायों के प्रति जागरूकता बढ़ाने में भी ऐसी मॉक ड्रिल महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।