Wednesday, July 29, 2026
पंचकूला पेड़ों की अवैध कटाई मामला

पंचकूला में 4,594 पेड़ों की कथित अवैध कटाई पर उठे सवाल, स्वतंत्र जांच की मांग

चंडीगढ़। पंचकूला जिले के मुवास, असरेवाली और एचएमटी पिंजौर क्षेत्र में हजारों खैर और सफेदा पेड़ों की कथित अवैध कटाई को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। चंडीगढ़ प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पर्यावरणविद् शीशपाल और अधिवक्ता संजीव चौधरी ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की किसी स्वतंत्र एजेंसी से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।

प्रेस वार्ता के दौरान बताया गया कि मुवास गांव के निकट पंजाब भूमि संरक्षण अधिनियम (PLPA), 1900 की धारा-4 के तहत संरक्षित क्षेत्र में मार्च 2025 के दौरान लगभग 2,000 सफेदा पेड़ों की कथित अवैध कटाई सामने आई थी। आरोप है कि 21 मार्च 2025 को संरक्षक वन, अंबाला द्वारा निरीक्षण के दौरान लगभग 4,000 नियोजित पेड़ों में से करीब 2,000 पेड़ों की कटाई की पुष्टि होने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।

इसके बाद फरवरी-मार्च 2026 में असरेवाली क्षेत्र में संरक्षित वन भूमि पर 1,138 बहुमूल्य खैर वृक्षों की अवैध कटाई का मामला सामने आया। वहीं मार्च 2026 में पिंजौर स्थित एचएमटी परिसर में भी 1,456 खैर वृक्षों की कटाई की बात सामने आई। इन तीनों मामलों में कुल 4,594 पेड़ों की कटाई की रिपोर्ट होने का दावा किया गया है।

निलंबित अधिकारियों की पुनर्नियुक्ति पर सवाल

पर्यावरणविदों ने आरोप लगाया कि असरेवाली मामले में तत्कालीन डीएफओ मोरनी-पिंजौर विशाल कौशिक, आरएफओ मुनीर गुप्ता और अन्य अधिकारियों को 20 मार्च 2026 को निलंबित किया गया था, लेकिन एक माह के भीतर ही उन्हें पुनः उसी क्षेत्र में तैनात कर दिया गया।

उन्होंने कहा कि जिन अधिकारियों के खिलाफ जांच चल रही हो, उन्हें उसी पद पर बहाल करना जांच की निष्पक्षता को प्रभावित कर सकता है। ऐसे अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से मुख्यालय भेजा जाना चाहिए, ताकि जांच स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से हो सके।

मामला NGT में विचाराधीन

प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया गया कि यह मामला वर्तमान में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) में विचाराधीन है। आईए संख्या 261/2026 के तहत महिमा दत्त को मामले में पक्षकार बनाए जाने की अनुमति दी गई है।

याचिकाकर्ता की ओर से यह आपत्ति भी उठाई गई कि जिन अधिकारियों पर मुख्य आरोप हैं, उन्हीं की ओर से अन्य प्रतिवादियों का जवाब दाखिल किया गया है। इस पर NGT ने सही तथ्यात्मक स्थिति स्पष्ट करने के लिए प्रतिवादी संख्या-1 को अगली सुनवाई में उपस्थित रहने के निर्देश दिए हैं।

पर्यावरण और वन्यजीवों के लिए गंभीर खतरा

पर्यावरण कार्यकर्ताओं का कहना है कि हरियाणा में वन क्षेत्र पहले ही कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का लगभग 3.65 प्रतिशत ही है। ऐसे में हजारों पेड़ों की कथित अवैध कटाई न केवल पर्यावरण बल्कि वन्यजीव आवास, भूजल संरक्षण और पारिस्थितिकी संतुलन के लिए भी गंभीर खतरा है।

उन्होंने सरकार से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की। पर्यावरणविदों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं सरकार और विभाग की छवि को भी नुकसान पहुंचाती हैं।