अंबाला। कहते हैं कि इंसान की सबसे बड़ी ताकत उसकी आवाज़ नहीं, बल्कि उसका हौसला होता है। अंबाला शहर के नागरिक अस्पताल की पैथोलॉजी लैब में इन दिनों यही हौसला हर दिन एक नई मिसाल बन रहा है। यहां छह मूक-बधिर छात्र मेडिकल लैब टेक्नोलॉजी (DMLT) का प्रशिक्षण ले रहे हैं। बिना बोले और बिना सुने भी ये छात्र अपने आत्मविश्वास, मेहनत और जिम्मेदारी से हर मरीज का भरोसा जीत रहे हैं।
इनकी कहानी यह साबित करती है कि यदि इरादे मजबूत हों, तो कोई भी शारीरिक कमी सफलता की राह में बाधा नहीं बन सकती।
पैथोलॉजी लैब में सीख रहे आधुनिक मेडिकल प्रशिक्षण
महाज्ञानी ऋषि अष्टावक्र केंद्र, सेक्टर-26 पंचकूला से आए ये छात्र एक वर्षीय डीएमएलटी प्रशिक्षण के तहत ब्लड सैंपलिंग, जैविक नमूनों का पंजीकरण, सुरक्षित संरक्षण, जांच की तैयारी और लैब टेक्नीशियन के निर्देशन में विभिन्न जांच प्रक्रियाओं में सहयोग कर रहे हैं।
इसके अलावा वे संक्रमण नियंत्रण, बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट और गुणवत्ता मानकों का भी व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।
मुस्कान और आत्मविश्वास से जीत रहे मरीजों का विश्वास
शुरुआत में कई मरीज यह देखकर हैरान हो जाते हैं कि उनका सैंपल लेने वाला प्रशिक्षु न सुन सकता है और न बोल सकता है। लेकिन कुछ ही पलों में इनकी मुस्कान, आत्मविश्वास और सटीक कार्यशैली हर संकोच को भरोसे में बदल देती है।
बिना शब्दों के भी ये छात्र अपने काम से ऐसा संवाद स्थापित करते हैं कि मरीज संतुष्ट होकर लैब से बाहर निकलते हैं।
स्वास्थ्य विभाग की देखरेख में चल रहा प्रशिक्षण
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की निगरानी में यह प्रशिक्षण केवल मेडिकल शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि समान अवसर और समावेशी समाज का संदेश भी दे रहा है।
डॉ. जितेंद्र ढिल्लों ने बताया कि सभी छात्र एक वर्ष के प्रशिक्षण के लिए नागरिक अस्पताल आए हैं। इनके साथ हमेशा एक अन्य प्रशिक्षु भी मौजूद रहता है, ताकि आवश्यकता पड़ने पर तुरंत सहायता मिल सके।
उन्होंने बताया कि अब तक किसी भी मरीज ने इनके काम को लेकर कोई शिकायत नहीं की। कई बार ये छात्र अन्य प्रशिक्षुओं से भी अधिक मेहनत और जिम्मेदारी के साथ अपना कार्य करते हैं।
हौसले की सबसे बुलंद आवाज़
इन छह युवाओं की कहानी केवल एक प्रशिक्षण कार्यक्रम की नहीं, बल्कि उन लाखों लोगों के लिए प्रेरणा है, जो किसी कमी को अपनी कमजोरी मान लेते हैं। ये छात्र हर दिन यह साबित कर रहे हैं कि सफलता के लिए आवाज़ नहीं, बल्कि मेहनत, लगन और आत्मविश्वास की जरूरत होती है।
