Saturday, August 8, 2026
सावन कांवड़ यात्रा

सावन में शिव भक्ति का उत्साह, हरिद्वार से गंगाजल लेकर पैदल लौट रहे कांवड़िए

अंबाला। सावन का पवित्र महीना भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। इस पूरे माह में शिवालयों में विशेष पूजा-अर्चना होती है और बड़ी संख्या में श्रद्धालु हरिद्वार और गोमुख से गंगाजल लेकर कांवड़ यात्रा पर निकलते हैं। हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और राजस्थान के हजारों कांवड़िए इन दिनों पैदल यात्रा करते हुए अपने-अपने शहरों की ओर बढ़ रहे हैं।

श्रद्धालुओं का कहना है कि सावन का महीना उनके लिए केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि महादेव के प्रति अटूट आस्था और समर्पण का प्रतीक है।

23 साल से कर रहे हैं कांवड़ यात्रा

कई कांवड़ियों ने बताया कि वे पिछले 23 वर्षों से लगातार कांवड़ यात्रा कर रहे हैं। उनका कहना है कि हरिद्वार से गंगाजल लेकर पैदल चलने से उन्हें मानसिक शांति, आत्मिक संतोष और महादेव की विशेष कृपा का अनुभव होता है।

श्रद्धालुओं के अनुसार, यह यात्रा कठिन जरूर होती है, लेकिन भगवान शिव की भक्ति उन्हें हर कदम पर नई ऊर्जा देती है।

शिवरात्रि पर होगा जलाभिषेक

कांवड़ियों ने बताया कि वे 11 अगस्त को शिवरात्रि के दिन अपने शहर के शिव मंदिर में पहुंचकर शिवलिंग पर गंगाजल अर्पित करेंगे। उनका विश्वास है कि सच्ची श्रद्धा और समर्पण के साथ की गई कांवड़ यात्रा से भगवान शिव सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।

आस्था, अनुशासन और सेवा का संगम

सावन के दौरान जगह-जगह कांवड़ शिविर भी लगाए जा रहे हैं, जहां श्रद्धालुओं के लिए भोजन, विश्राम, चिकित्सा और अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की जा रही है। प्रशासन और सामाजिक संस्थाएं भी कांवड़ियों की सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने के लिए विशेष इंतजाम कर रही हैं।

श्रद्धालुओं का कहना है कि कांवड़ यात्रा उन्हें शिव के और करीब ले जाती है और यही कारण है कि वे हर वर्ष सावन का बेसब्री से इंतजार करते हैं।