चंडीगढ़: भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने जिला अदालत परिसर में नई पार्किंग का उद्घाटन करते हुए कहा कि यह परियोजना लंबे समय से लंबित थी और इसके पूरा होने से वकीलों, वादकारियों तथा आम नागरिकों को बड़ी राहत मिलेगी। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका की बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करना समय की आवश्यकता है और जिला अदालत की नई पार्किंग इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस दौरान उन्होंने भरोसा जताया कि पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में लंबे समय से चली आ रही पार्किंग समस्या का भी जल्द स्थायी समाधान निकलेगा।
मुख्य न्यायाधीश ने न्यायिक लंबित मामलों को लेकर भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि अक्सर देश में 5 करोड़ लंबित मामलों की बात कही जाती है, लेकिन इनमें करीब 2 करोड़ मामले न्यायिक प्रक्रिया के शुरुआती चरणों में हैं, जैसे नोटिस जारी होना या जवाब दाखिल होना। इसके बावजूद लंबित मामलों का बोझ न्यायपालिका के सामने बड़ी चुनौती है, जिसे तकनीक, गुणवत्तापूर्ण नियुक्तियों और बेहतर न्यायिक प्रबंधन के जरिए कम करने के प्रयास लगातार किए जा रहे हैं।
सीजेआई ने कहा कि भारतीय न्यायपालिका तकनीक के उपयोग के मामले में दुनिया की अग्रणी न्यायिक व्यवस्थाओं में शामिल है। ई-फाइलिंग, वर्चुअल सुनवाई और ऑनलाइन केस ट्रैकिंग जैसी सुविधाओं से दूरदराज और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए न्याय तक पहुंच पहले की तुलना में काफी आसान हुई है। अब कोई भी व्यक्ति अपने स्थानीय वकील के माध्यम से घर बैठे केस दायर कर सकता है और उसकी सुनवाई व अगली तारीख की जानकारी ऑनलाइन प्राप्त कर सकता है।
हाईकोर्ट में अंग्रेजी के स्थान पर हिंदी या स्थानीय भाषा में कार्यवाही के सवाल पर न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि यह विषय संबंधित हाईकोर्ट और राज्य सरकारों के अधिकार क्षेत्र में आता है। जहां सहमति बनेगी, वहां इस दिशा में उचित निर्णय लिया जा सकता है। वहीं कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के उपयोग पर उन्होंने कहा कि न्यायपालिका AI का जिम्मेदारी और नियामकीय ढांचे के तहत उपयोग कर रही है तथा भविष्य में इसका दायरा और बढ़ाया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतिम निर्णय हमेशा न्यायाधीश के स्वतंत्र विवेक पर ही आधारित रहेगा।
