लंबित मांगों को लेकर कर्मचारियों में बढ़ा रोष
पानीपत। हरियाणा भर के कोऑपरेटिव बैंक कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के नेतृत्व में पानीपत सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों में कर्मचारियों ने प्रदर्शन करते हुए सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया। कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि यदि 3 जुलाई तक उनकी मांगों का समाधान नहीं हुआ तो प्रदेशभर से हजारों कर्मचारी सहकारिता मंत्री अरविंद शर्मा के आवास का घेराव करेंगे।
सड़कों पर उतरे कर्मचारी, सरकार के खिलाफ नारेबाजी
प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अपनी मांगों को जल्द पूरा करने की मांग उठाई। इस दौरान कर्मचारी नेताओं ने कहा कि सरकार से कई दौर की बातचीत और बैठकों के बावजूद उनकी प्रमुख मांगें अब तक लंबित हैं, जिससे कर्मचारियों में भारी नाराजगी है।
वेतन विसंगति और प्रमोशन हैं प्रमुख मुद्दे
कर्मचारी नेताओं के अनुसार उनकी दो प्रमुख मांगें हैं। पहली मांग वेतन संबंधी त्रुटियों और विसंगतियों को दूर करने की है, जबकि दूसरी मांग पदोन्नति (प्रमोशन) से जुड़ी हुई है।
उन्होंने बताया कि प्रमोशन को लेकर विभाग द्वारा परीक्षा प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, लेकिन वेतन संबंधी मांग लंबे समय से लंबित पड़ी हुई है। इसी मुद्दे को लेकर कर्मचारी लगातार सरकार और विभागीय अधिकारियों के साथ बातचीत कर रहे हैं।
कई बैठकों के बाद भी नहीं निकला समाधान
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वेतन विसंगति के मुद्दे पर सरकार के उच्च अधिकारियों के साथ कई बार बैठकें हो चुकी हैं। इसके बावजूद अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। कर्मचारियों का आरोप है कि सरकार बार-बार आश्वासन दे रही है, लेकिन उनकी मांगों को लागू नहीं किया जा रहा।
3 जुलाई को होगा मंत्री आवास का घेराव
कर्मचारी नेताओं ने स्पष्ट कहा कि यदि सरकार ने समय रहते उनकी मांगों को स्वीकार नहीं किया, तो 3 जुलाई को हरियाणा के विभिन्न जिलों से हजारों कर्मचारी एकजुट होकर सहकारिता मंत्री अरविंद शर्मा के आवास का घेराव करेंगे।
उन्होंने कहा कि यह आंदोलन केवल कर्मचारियों के हितों के लिए नहीं, बल्कि सहकारी बैंकिंग व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए भी जरूरी है।
सरकार से जल्द समाधान निकालने की अपील
प्रदर्शनकारियों ने सरकार से मांग की है कि कर्मचारियों की लंबित समस्याओं का जल्द समाधान किया जाए, ताकि आंदोलन की स्थिति पैदा न हो। वहीं, कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों की अनदेखी जारी रही तो भविष्य में आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है।
