Saturday, May 30, 2026

UJJWAL DISHA:कैथल में निजी स्कूलों पर सख्ती, मनमानी फीस और किताबों की बिक्री पर डीसी ने लगाई लगाम

कैथल, —
जिले में निजी स्कूलों द्वारा दाखिले के दौरान किताबों और स्टेशनरी की मनमानी कीमतों को लेकर मिल रही शिकायतों पर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। उपायुक्त अपराजिता ने इस मामले में संज्ञान लेते हुए निजी स्कूल एसोसिएशन के प्रतिनिधियों के साथ अहम बैठक की और स्पष्ट निर्देश दिए कि शिक्षा विभाग के नियमों के तहत ही फीस, किताबें और अन्य मापदंड तय किए जाएं।

बैठक में डीसी ने स्कूल संचालकों को चेतावनी दी कि किसी एक पुस्तक विक्रेता को ही स्कूल की किताबें बेचने के लिए अधिकृत करना गलत है और इससे अभिभावकों का आर्थिक शोषण होता है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की प्रथा पर तुरंत रोक लगाई जाए।


एक विक्रेता की ‘मोनोपॉली’ खत्म करने के निर्देश

उपायुक्त अपराजिता ने साफ कहा कि निजी स्कूल किसी एक पुस्तक विक्रेता के साथ गठजोड़ कर किताबों और स्टेशनरी की बिक्री नहीं कर सकते।

उन्होंने निर्देश दिए कि अभिभावकों को स्कूल में पढ़ाई जाने वाली सभी पुस्तकों की सूची उपलब्ध कराई जाए, ताकि वे अपनी सुविधा अनुसार किसी भी दुकान से किताबें खरीद सकें।

डीसी ने कहा कि एक ही विक्रेता को अधिकृत करने से कीमतों में पारदर्शिता खत्म हो जाती है और अभिभावकों को मजबूरी में महंगी दरों पर सामान खरीदना पड़ता है।


अनावश्यक सामग्री खरीदने का दबाव न बनाएं

बैठक के दौरान यह भी सामने आया कि कई स्कूल अभिभावकों पर अतिरिक्त और अनावश्यक सामग्री खरीदने का दबाव डालते हैं।

इस पर डीसी ने सख्त नाराजगी जताते हुए कहा कि किसी भी अभिभावक को ऐसी सामग्री खरीदने के लिए बाध्य नहीं किया जाए, जो पढ़ाई के लिए जरूरी नहीं है।

उन्होंने कहा कि शिक्षा के नाम पर किसी भी प्रकार का आर्थिक बोझ डालना उचित नहीं है और इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।


फीस ढांचे पर भी सख्त निर्देश

उपायुक्त ने फीस से जुड़े मुद्दों पर भी स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए। उन्होंने कहा कि दाखिला फीस, मासिक फीस और अन्य शुल्क शिक्षा विभाग द्वारा निर्धारित नियमों के अनुसार ही तय किए जाएं।

अनावश्यक फीस वृद्धि पर रोक लगाने के निर्देश देते हुए उन्होंने कहा कि यदि कोई स्कूल बिना अनुमति के फीस बढ़ाता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

डीसी ने कहा कि शिक्षा एक संवेदनशील क्षेत्र है और इसमें पारदर्शिता व जवाबदेही बेहद जरूरी है।


‘शिक्षा की लौ जलाने में अहम भूमिका’—डीसी

उपायुक्त अपराजिता ने निजी स्कूल संचालकों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि वे शिक्षा के क्षेत्र में समाज के विकास में अहम योगदान दे रहे हैं।

उन्होंने कहा कि यह जिम्मेदारी भी उनकी है कि वे अभिभावकों के साथ न्याय करें और किसी प्रकार की मनमानी न करें।

“निजी स्कूल एसोसिएशन खुद यह सुनिश्चित करे कि कोई भी स्कूल अभिभावकों के साथ अनुचित व्यवहार न करे,” उन्होंने कहा।


शिकायत मिलने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी

डीसी ने स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में इस प्रकार की कोई शिकायत सामने आती है, तो संबंधित स्कूल के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने कहा कि प्रशासन इस पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है और किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।


जिला शिक्षा अधिकारी ने भी किया नियमों के पालन का आह्वान

बैठक में मौजूद जिला शिक्षा अधिकारी सुभाष ने भी स्कूल संचालकों से अपील की कि वे सभी नियमों का पालन करते हुए अपने संस्थान चलाएं।

उन्होंने कहा कि उपायुक्त के मार्गदर्शन में स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और भविष्य में किसी भी शिकायत पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी।


स्कूल एसोसिएशन ने दिया सहयोग का आश्वासन

निजी स्कूल संचालक एसोसिएशन के प्रतिनिधियों—कुलदीप सिंह, कुलदीप पूनिया, खुशी राम, प्रदीप कुमार और बलजिंद्र संधू सहित अन्य पदाधिकारियों ने प्रशासन को पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया।

उन्होंने कहा कि वे सभी स्कूल संचालकों से अपील करेंगे कि वे सरकार और शिक्षा विभाग के नियमों का पालन करें और अभिभावकों के हितों का ध्यान रखें।

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