भीषण गर्मी और बारिश न होने के बावजूद किसान जीरी (धान) की बुवाई में जुट गए हैं। 20 जून से किसानों ने अपने खेतों में जीरी लगाने का काम शुरू कर दिया है। आगामी मानसून को देखते हुए किसान समय पर फसल तैयार करने में लगे हुए हैं, ताकि तीन महीने बाद फसल पककर मंडियों तक पहुंच सके।
आमतौर पर किसान 15 जून से ही जीरी की बुवाई शुरू कर देते हैं। हालांकि इस बार गर्मी अधिक होने और बारिश नहीं होने के कारण किसानों को पानी की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। जीरी की फसल को अधिक पानी की आवश्यकता होती है, इसलिए कई किसान अपने खेतों में बोर लगवाने लगे हैं, ताकि सिंचाई में किसी प्रकार की परेशानी न आए।
किसानों का कहना है कि जीरी की फसल के लिए खेतों को विशेष रूप से तैयार किया जाता है। खेत तैयार होने के बाद मजदूरों की सहायता से रोपाई का कार्य किया जाता है। किसानों के अनुसार, तीन महीने में तैयार होने वाली इस फसल के लिए नियमित सिंचाई बेहद जरूरी होती है।
किसान बलवंत सिंह ने बताया कि टांगरी क्षेत्र के आसपास हाइब्रिड जीरी की खेती अधिक की जाती है, क्योंकि इसकी बाजार में बेहतर कीमत मिलती है और किसानों को अधिक लाभ होता है। उन्होंने कहा कि मौसम अनिश्चित जरूर है, लेकिन खेतों में लगाए जा रहे बोर पानी की कमी को काफी हद तक दूर कर रहे हैं।
वहीं, बोर लगाने का कार्य कर रहे किसानों का कहना है कि बारिश में देरी के कारण भूमिगत जल स्रोतों पर निर्भरता बढ़ गई है। किसानों को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में मानसून सक्रिय होगा, जिससे जीरी की फसल को फायदा मिलेगा और उत्पादन बेहतर रहेगा।
