Wednesday, June 10, 2026

UJJWAL DISHA: देवठी मझगांव में करियाला और नाटी को मिला नया जीवन, युवाओं ने मंच पर दिखाई लोक संस्कृति की झलक

राजगढ़ (सिरमौर), 9 जून। सिरमौर की समृद्ध लोक संस्कृति को सहेजने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में देवठी मझगांव में एक प्रेरणादायक पहल सामने आई है। पद्मश्री विद्यानंद सरैक के मार्गदर्शन में संचालित करियाला एवं सिरमौरी नाटी प्रशिक्षण कार्यक्रम का मूल्यांकन करने के लिए संगीत नाटक अकादेमी, नई दिल्ली की विशेषज्ञ टीम ने क्षेत्र का दौरा किया। इस दौरान युवा कलाकारों ने अपनी उत्कृष्ट प्रस्तुतियों से दर्शकों और विशेषज्ञों का मन मोह लिया।

संगीत नाटक अकादेमी की कला दीक्षा योजना के अंतर्गत पिछले एक वर्ष से संचालित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में क्षेत्र के युवा पारंपरिक करियाला (स्वांग) और सिरमौरी नाटी का व्यवस्थित प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। मूल्यांकन के दौरान प्रशिक्षु कलाकारों ने पारंपरिक वेशभूषा में करियाला का मंचन करते हुए लोक जीवन, सामाजिक सरोकारों तथा हास्य-व्यंग्य से भरपूर प्रस्तुतियां दीं। इसके पश्चात कलाकारों ने सिरमौर की सांस्कृतिक पहचान मानी जाने वाली विभिन्न नाटियों का मनमोहक प्रदर्शन किया।

कार्यक्रम की विशेषता यह रही कि कलाकारों ने केवल प्रस्तुति ही नहीं दी, बल्कि इन लोक कलाओं के इतिहास, महत्व और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी भी साझा की। उनकी प्रतिभा, आत्मविश्वास और मंच संचालन ने मूल्यांकन टीम को विशेष रूप से प्रभावित किया।

प्रशिक्षण कार्यक्रम का संचालन पद्मश्री विद्यानंद सरैक द्वारा किया जा रहा है। उनके निर्देशन में लगभग दस युवा करियाला और नाटी जैसी दुर्लभ लोक विधाओं को सीखकर इन्हें आगे बढ़ाने का कार्य कर रहे हैं।

इस अवसर पर कला दीक्षा योजना के प्रभारी दीपक जोशी ने कहा कि संगीत नाटक अकादेमी गुरु-शिष्य परंपरा के माध्यम से देशभर की पारंपरिक कलाओं के संरक्षण के लिए कार्य कर रही है। वर्तमान में देश के विभिन्न राज्यों में लगभग 80 गुरु युवाओं को प्रशिक्षण प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने देवठी मझगांव में करियाला और नाटी के संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए इसे अत्यंत महत्वपूर्ण पहल बताया।

मूल्यांकन टीम में शामिल रविन्द्र किरार और नरवीर सिंह ने भी प्रशिक्षण की गुणवत्ता और युवाओं के समर्पण की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि लोक संस्कृति के प्रति युवाओं का उत्साह इस बात का संकेत है कि यह पहल भविष्य में इन विलुप्तप्राय कलाओं के संरक्षण और संवर्धन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

विशेषज्ञों के अनुसार आधुनिकता के दौर में करियाला, स्वांग और सिरमौरी नाटी जैसी कई लोक विधाएं धीरे-धीरे हाशिए पर चली गई थीं। ऐसे समय में कला दीक्षा योजना के अंतर्गत चल रहे प्रशिक्षण कार्यक्रम इन कलाओं को पुनर्जीवित करने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बन रहे हैं।

कार्यक्रम के दौरान क्षेत्र के अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। सरैक परिवार की ओर से सभी अतिथियों का पारंपरिक हिमाचली टोपी पहनाकर सम्मानपूर्वक स्वागत किया गया।

देवठी मझगांव में चल रही यह पहल न केवल लोक कलाओं को नया जीवन दे रही है, बल्कि युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़कर हिमाचल की समृद्ध विरासत को सशक्त बनाने का कार्य भी कर रही है।