तों में अनुसंधान अधिकारियों की ओर से की गई कार्रवाई की भी समीक्षा की जाती है, ताकि पीड़ित महिलाओं को समय पर न्याय मिल सके। आयोग संबंधित विभागों और अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित कर शिकायतों पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने का प्रयास करता है।
पति-पत्नी के विवाद का बच्चों के भविष्य पर पड़ता है असर
चेयरपर्सन ने कहा कि छोटी-छोटी बातों और गलतफहमियों के कारण परिवारों में विवाद बढ़ रहे हैं। पति-पत्नी के बीच अहंकार की लड़ाई का असर बच्चों की शिक्षा और भविष्य पर भी पड़ता है। इसलिए परिवारों को आपसी प्यार, समझ और सम्मान के साथ रहना चाहिए।
उन्होंने कहा कि आयोग जरूरत के अनुसार परिवार के बुजुर्गों को भी बातचीत में शामिल करता है, ताकि विवादों को सुलझाने में मदद मिल सके। आयोग का प्रयास रहता है कि सभी संबंधित पक्षों को सुनने और उपलब्ध तथ्यों की समीक्षा के बाद नियमानुसार उचित कार्रवाई की जाए।
जनसुनवाई से समस्याओं के त्वरित समाधान पर जोर
उषा प्रियदर्शी ने कहा कि महिला आयोग महिलाओं की समस्याओं को गंभीरता से सुनने और उनका समाधान करने के लिए प्रतिबद्ध है। जनसुनवाई के माध्यम से शिकायतकर्ताओं को अपनी बात रखने का अवसर मिलता है और संबंधित अधिकारियों की कार्रवाई की समीक्षा भी की जाती है। आयोग का प्रयास है कि महिलाओं को समय पर राहत मिले और पारिवारिक विवादों का समाधान उचित तरीके से हो सके।
