Wednesday, July 29, 2026

पिहोवा धान घोटाले में अधिकारियों की मिलीभगत का आरोप, भाकियू नेता प्रिंस वड़ैच ने मांगी FIR

कुरुक्षेत्र। पिहोवा में सामने आए कथित धान घोटाले को लेकर भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के नेता प्रिंस वड़ैच ने खाद्य एवं आपूर्ति विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कुरुक्षेत्र की जाट धर्मशाला में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने घोटाले की निष्पक्ष जांच करवाने तथा दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग की।

प्रिंस वड़ैच ने कहा कि करोड़ों रुपये के इस कथित धान घोटाले में केवल राइस मिल संचालकों को जिम्मेदार ठहराना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि विभाग के निरीक्षक, एएफएसओ और अन्य अधिकारियों की मिलीभगत के बिना इतनी बड़ी अनियमितता संभव नहीं थी। उन्होंने कहा कि पूरे मामले में अब तक कार्रवाई केवल निलंबन तक सीमित रखना विभागीय संरक्षण को दर्शाता है।

उन्होंने बताया कि चौधरी राइस मिल के खिलाफ एफआईआर संख्या 79/2026 दर्ज की जा चुकी है। विभागीय निरीक्षण और भौतिक सत्यापन के दौरान मिल परिसर में 33 हजार क्विंटल से अधिक धान की कमी पाई गई थी। जांच के दौरान धान के स्टैक में तूड़ी, पराली और अन्य सामग्री मिलने के साथ-साथ होदी में लोहे की जाली भी बरामद हुई थी।

भाकियू नेता ने दावा किया कि विभागीय पत्राचार में निरीक्षक और एएफएसओ की कथित मिलीभगत की पुष्टि होने के बावजूद कार्रवाई में देरी की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि 30 मार्च 2026 को जांच रिपोर्ट सामने आने के बावजूद फाइल करीब तीन महीने तक लंबित रखी गई।

प्रिंस वड़ैच ने फ्लीट रोबो डेटा को घोटाले का अहम सबूत बताते हुए कहा कि अनाज मंडियों से राइस मिल तक धान पहुंचाने वाले वाहनों की लोकेशन और दूरी के रिकॉर्ड में गंभीर विसंगतियां सामने आई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकांश वाहनों की वास्तविक लोकेशन रिकॉर्ड में दर्शाई गई राइस मिल से मेल नहीं खाती। कई वाहनों द्वारा शून्य दूरी तय करने और एक ही समय में एक चालक द्वारा कई गाड़ियों का संचालन दिखाए जाने जैसे तथ्य पूरे मामले को संदिग्ध बनाते हैं।

उन्होंने कहा कि यह मामला एक संगठित आर्थिक अपराध का प्रतीत होता है, जिससे सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ है। ऐसे में पूरे प्रकरण की स्वतंत्र एजेंसी से निष्पक्ष जांच करवाई जानी चाहिए और जांच प्रभावित होने से बचाने के लिए संबंधित अधिकारियों को तत्काल मुख्यालय भेजा जाना चाहिए।

भाकियू नेता ने चेतावनी दी कि यदि मामले में निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो किसान संगठन आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।