जींद: पिछले तीन महीनों से निजी बसों (परिवहन समिति) में पास को लेकर चल रहा संशय अब खत्म हो गया है। परिवहन आयुक्त, चंडीगढ़ ने स्पष्ट कर दिया है कि परिवहन समिति की बसों में पहले की तरह ही बुजुर्गों और विद्यार्थियों के रियायती बस पास मान्य होंगे। इस संबंध में क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (RTO) के नाम लिखित आदेश जारी कर दिए गए हैं।
हाईकोर्ट की आड़ में चल रहा था विवाद
पिछले काफी समय से निजी बस संचालक यह तर्क दे रहे थे कि उन्होंने रियायती पास को लेकर हाईकोर्ट में याचिका डाली हुई है। इस बहाने चालक और परिचालक अक्सर बुजुर्गों और छात्रों को बस में चढ़ाने से मना करते थे या उनसे बुरा व्यवहार करते थे। कई बार यात्रियों ने इसकी शिकायत ‘समाधान शिविर’ में भी दर्ज कराई थी। स्थानीय अधिकारियों ने इस गतिरोध को खत्म करने के लिए मुख्यालय से स्पष्ट निर्देश मांगे थे।
स्टेज कैरिज स्कीम 2016 का दिया हवाला
परिवहन आयुक्त द्वारा जारी पत्र में स्पष्ट किया गया है कि:
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नियमों की बाध्यता: ‘स्टेज कैरिज स्कीम 2016’ के अंतर्गत परमिट की शर्तों के अनुसार, सभी निजी बस संचालक छात्रों, बुजुर्गों और मुफ्त पास धारकों को अपनी बसों में बैठाने के लिए उसी तरह बाध्य हैं, जैसे हरियाणा रोडवेज की बसें होती हैं।
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कोई सब्सिडी नहीं: पत्र में यह भी साफ किया गया है कि मुफ्त या रियायती यात्रा के बदले संचालकों को कोई अलग से सब्सिडी देय नहीं होगी।
3000 से अधिक विद्यार्थियों को मिलेगा सीधा लाभ
जिले में परिवहन समिति की कुल 162 बसें विभिन्न रूटों पर चल रही हैं। विशेषकर नरवाना, उचाना, हांसी और असंध जैसे रूटों पर निजी बसों की संख्या अधिक है। ग्रामीण क्षेत्रों से शहर के स्कूल-कॉलेजों में आने वाले लगभग तीन हजार विद्यार्थियों और सैकड़ों बुजुर्गों को इस फैसले से बड़ी राहत मिलेगी। अब उन्हें निजी बसों में सफर के लिए अतिरिक्त किराया नहीं देना होगा।
अधिकारियों की चेतावनी: दुर्व्यवहार किया तो होगी कार्रवाई
जिला परिवहन अधिकारी सुनील पूनिया और ड्यूटी इंस्पेक्टर ने बस संचालकों को सख्त हिदायत दी है। अधिकारियों ने कहा:
“मुख्यालय से निर्देश मिल चुके हैं। परिवहन समिति की बसों के चालक और परिचालक यात्रियों के साथ सम्मानजनक व्यवहार करें और पास धारकों को बस में यात्रा सुनिश्चित कराएं। यदि कोई नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।”
