सिरमौर / नोहराधार। हिमाचल प्रदेश के जिला सिरमौर के नोहराधार क्षेत्र से शिक्षा विभाग की एक बेहद हैरान करने वाली और चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। राजकीय प्राथमिक पाठशाला देवामानल पिछले करीब दो माह से बिना किसी नियमित (स्थायी) शिक्षक के संचालित हो रही है। शिक्षक का स्थानांतरण (तबादला) होने के बाद से विभाग ने यहां किसी अन्य शिक्षक की स्थायी नियुक्ति नहीं की है, जिसके चलते स्कूल के 51 नौनिहालों की पढ़ाई पूरी तरह से अस्थायी और जुगाड़ू व्यवस्थाओं के सहारे चल रही है।
📌 नर्सरी से पांचवीं तक 7 कक्षाएं, लेकिन बैठने को सिर्फ एक कमरा!
समाजसेवी कपिल शर्मा ने स्कूल की बदहाली का पर्दाफाश करते हुए बताया कि विद्यालय में केवल शिक्षकों की ही कमी नहीं है, बल्कि बुनियादी ढांचा भी पूरी तरह ध्वस्त है। स्कूल में नर्सरी, केजी (KG) और पहली से लेकर पांचवीं कक्षा तक के सभी बच्चों को एक ही कमरे के भीतर भेड़-बकरियों की तरह बैठकर पढ़ाई करनी पड़ रही है। एक ही कमरे में 7 अलग-अलग कक्षाओं के बच्चों के बैठने से न तो शिक्षक ठीक से पढ़ा पा रहे हैं और न ही विद्यार्थियों को उचित शैक्षणिक वातावरण मिल पा रहा है।
🤝 पिछले 5 वर्षों से अपनी जेब से पैसे देकर अध्यापिका रख रहे हैं ग्रामीण
इस स्कूल की बेरुखी की दास्तां वर्षों पुरानी है। समाजसेवी कपिल शर्मा के मुताबिक, पिछले लगभग पांच वर्षों से गांव के अभिभावक स्वयं अपनी जेब से आर्थिक सहयोग (चंदा) जुटाकर एक स्थानीय अध्यापिका की व्यवस्था कर रहे हैं, ताकि बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह ठप न हो जाए। सरकार और विभाग के दावों के बीच ग्रामीणों का यह प्रयास व्यवस्था पर एक बड़ा तमाचा है।
🧑प्ट वर्तमान में प्रशिक्षु और स्वयंसेवियों के भरोसे चल रही पाठशाला
पाठशाला प्रभारी करम दास ने बताया कि स्कूल में वर्तमान में 51 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। नियमित शिक्षक न होने के कारण फिलहाल स्कूल को डेपुटेशन (प्रतिनियुक्ति) व्यवस्था के माध्यम से जैसे-तैसे चलाया जा रहा है। वर्तमान में गांव के दो जेबीटी (JBT) एवं डीएलएड (D.El.Ed) प्रशिक्षु अपनी टीचिंग प्रैक्टिस के दौरान बच्चों को पढ़ा रहे हैं, साथ ही अभिभावकों द्वारा नियुक्त स्वयंसेवी अध्यापिका भी सहयोग कर रही हैं। करम दास ने साफ कहा कि सभी के सामूहिक प्रयासों से पढ़ाई तो जारी है, लेकिन यह कोई स्थायी समाधान नहीं है।
📩 DDSE नाहन से स्थायी समाधान की गुहार
स्कूल प्रभारी करम दास ने बताया कि इस गंभीर समस्या के संबंध में उप निदेशक प्रारंभिक शिक्षा (DDSE) नाहन को आधिकारिक ई-मेल भेजा गया है। विभाग से मांग की गई है कि या तो विद्यालय में तुरंत नियमित शिक्षक की स्थायी नियुक्ति की जाए या फिर किसी अन्य विद्यालय से लंबी अवधि के लिए किसी अध्यापक को प्रतिनियुक्त (डेपुटेशन) किया जाए।
“बच्चों के भविष्य के साथ इस तरह का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। हमारी प्रदेश सरकार और शिक्षा विभाग से पुरजोर मांग है कि देवामानल स्कूल में स्वीकृत शिक्षकों के खाली पदों को तुरंत भरा जाए और नए भवन की व्यवस्था कर इस बदहाल व्यवस्था का स्थायी समाधान किया जाए।”
— कपिल शर्मा, समाजसेवी एवं स्थानीय ग्रामीण
स्थानीय अभिभावकों और ग्रामीणों ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि विभाग अब केवल खोखले आश्वासन या अस्थायी कदम न उठाए, बल्कि बच्चों के भविष्य को देखते हुए यहाँ तुरंत स्थायी और ठोस व्यवस्था सुनिश्चित करे।
