आचार्य देवव्रत ने दिया ईंधन बचाने और पर्यावरण संरक्षण का संदेश
कुरुक्षेत्र। Acharya Devvrat ने वीरवार को धर्मनगरी कुरुक्षेत्र में अनोखी मिसाल पेश करते हुए लोगों को ईंधन बचाने और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। गुजरात के राज्यपाल दिल्ली से ट्रेन के जरिए कुरुक्षेत्र रेलवे स्टेशन पहुंचे और वहां से साइकिल पर गुरुकुल कुरुक्षेत्र के लिए रवाना हुए।
राज्यपाल के साथ उनकी सुरक्षा टीम भी साइकिल पर नजर आई, जबकि आगे गुरुकुल कुरुक्षेत्र की दो इलेक्ट्रिक गाड़ियां चल रही थीं। इस दौरान रेलवे स्टेशन और आसपास के क्षेत्र में लोगों की भीड़ उन्हें देखने के लिए उमड़ पड़ी।
आचार्य देवव्रत ने कहा कि जब तक देश में तेल की स्थिति सामान्य नहीं होती, तब तक वे हवाई जहाज और हेलिकॉप्टर का इस्तेमाल नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि उनकी अधिकतर यात्राएं ट्रेन, बस और साइकिल से ही होंगी तथा उनके काफिले में तीन से अधिक गाड़ियां नहीं रहेंगी।
उन्होंने कहा कि एशिया और दुनिया के कई हिस्सों में लंबे समय से तनाव और युद्ध जैसे हालात बने हुए हैं। अमेरिका और ईरान सहित कई देशों के बीच जारी संघर्ष का असर तेल आपूर्ति पर पड़ा है, जिससे भारत में तेल आयात प्रभावित हुआ है। ऐसे समय में प्रत्येक देशवासी का कर्तव्य बनता है कि वह प्रधानमंत्री Narendra Modi के आह्वान को स्वीकार करते हुए ईंधन की बचत करे।
राज्यपाल ने विदेशी वस्तुओं पर निर्भरता कम करने और स्वदेशी अपनाने पर जोर देते हुए कहा कि इससे देश आर्थिक रूप से अधिक मजबूत बनेगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विकसित भारत की दिशा में तेजी से काम कर रहे हैं और बीते वर्षों में हुए विकास कार्य इसका प्रमाण हैं।
आचार्य देवव्रत ने कहा कि वे आज भी गुरुकुल के संस्कारों को जीवन में उतारते हैं। दिल्ली से कुरुक्षेत्र ट्रेन से आए हैं और वापसी भी ट्रेन से ही करेंगे। गांवों में रात्रि प्रवास के दौरान वे सरकारी स्कूलों तथा अनुसूचित जाति-जनजाति परिवारों में रुकते हैं और लोगों को पशुपालन, गौ आधारित खेती, बच्चों में संस्कार, नशामुक्ति और स्वच्छता के प्रति जागरूक करते हैं।
उन्होंने कहा कि वे केवल औपचारिक कार्यक्रमों तक सीमित नहीं रहते, बल्कि हर सप्ताह गांव-गांव जाकर लोगों से सीधा संवाद करते हैं। गुजरात में वे लगातार प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने का अभियान चला रहे हैं।
किसानों से प्राकृतिक खेती अपनाने की अपील करते हुए राज्यपाल ने कहा कि देश हर वर्ष यूरिया पर ढाई लाख करोड़ रुपये खर्च करता है। यदि किसान रासायनिक खेती छोड़कर प्राकृतिक खेती अपनाएं तो धरती, पानी और पर्यावरण को बचाया जा सकता है। साथ ही कैंसर, हार्ट अटैक और डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारियों से भी राहत मिल सकती है।
उन्होंने दावा किया कि प्राकृतिक खेती में उत्पादन कम नहीं होता, बल्कि किसानों की लागत घटती है और जमीन की उर्वरता बढ़ती है।
