Wednesday, October 7, 2026
Adani Gas APK साइबर ठगी

Adani Gas बिल अपडेट के नाम पर साइबर ठगी, 7 आरोपी गिरफ्तार; 72 वर्षीय बुजुर्ग से उड़ाए ₹5.12 लाख

चंडीगढ़: साइबर ठगी के खिलाफ पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है। Adani Gas बिल अपडेट करने के नाम पर APK फाइल भेजकर लोगों के बैंक खातों से रकम उड़ाने वाले कथित अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का पुलिस ने भंडाफोड़ करने का दावा किया है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए सूरत और दिल्ली से कुल 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

Adani Gas बिल अपडेट के नाम पर 72 वर्षीय बुजुर्ग को बनाया निशाना

पुलिस के अनुसार, गिरोह ने एक 72 वर्षीय वरिष्ठ नागरिक विजय भाई को निशाना बनाया। उन्हें Adani Gas बिल अपडेट करने के नाम पर एक APK लिंक भेजा गया। लिंक पर क्लिक करने के बाद उनका मोबाइल फोन कथित तौर पर साइबर ठगों के नियंत्रण में आ गया।

इसके बाद तीन अलग-अलग ट्रांजैक्शन के जरिए उनके बैंक खाते से ₹5,12,344 निकाल लिए गए। ठगी का पता चलने के बाद पीड़ित ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

फर्जी गैस बिल या कनेक्शन अपडेट के नाम पर malicious APK भेजकर मोबाइल और बैंकिंग जानकारी तक पहुंच बनाने का तरीका हाल के महीनों में सामने आए कई साइबर फ्रॉड मामलों में देखा गया है।

PSI अजय प्रकाश के नेतृत्व में बनाई गई विशेष टीम

शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए PSI अजय प्रकाश के नेतृत्व में विशेष टीम का गठन किया। तकनीकी जांच और उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास किया।

जांच के बाद पुलिस ने सूरत और दिल्ली से 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक, इनमें से 5 आरोपियों को सूरत से और एक आरोपी को दिल्ली से पकड़ा गया, जबकि उपलब्ध जानकारी में सातवें आरोपी की गिरफ्तारी का स्थान अलग से स्पष्ट नहीं किया गया है।

आरोपियों के फोन से हजारों उपभोक्ताओं का डेटा मिलने का दावा

पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल फोन की जांच के दौरान करीब 20,000 Adani Gas उपभोक्ताओं और 1,000 से अधिक बैंक खाताधारकों का डेटा मिला है।

पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि यह डेटा आरोपियों के पास कैसे पहुंचा और इसका इस्तेमाल कितने लोगों को साइबर ठगी का निशाना बनाने के लिए किया गया।

जेल में हुई मुलाकात के बाद साइबर फ्रॉड की साजिश का आरोप

जांच अधिकारी बसंत के मुताबिक, इस गिरोह के तार झारखंड के गिरिडीह और देवघर से जुड़े होने की बात सामने आई है। पुलिस के अनुसार, कुछ आरोपी जेल में रहने के दौरान एक-दूसरे के संपर्क में आए थे और वहीं से साइबर ठगी की साजिश तैयार की गई।

जांच में यह भी सामने आने का दावा किया गया है कि गिरोह Telegram के जरिए डेटा हासिल करता था। इसके बाद कथित तौर पर Adani Gas उपभोक्ताओं को बिल अपडेट या भुगतान से संबंधित संदेश भेजकर APK फाइल डाउनलोड करने के लिए कहा जाता था।

फाइल इंस्टॉल होने के बाद मोबाइल डिवाइस तक अनधिकृत पहुंच बनाकर बैंकिंग लेनदेन किए जाने का आरोप है। ऐसे ही फर्जी Adani Gas APK मामलों में पुलिस ने पहले भी malicious applications के इस्तेमाल की जानकारी दी है।

साइबर सेल की लोगों से अपील- APK फाइल वाले लिंक पर क्लिक न करें

साइबर सेल अधिकारी बसंत ने आम जनता से सावधानी बरतने की अपील की है। उन्होंने कहा कि किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें और विशेष रूप से WhatsApp, SMS या अन्य माध्यम से भेजी गई .apk फाइल को डाउनलोड या इंस्टॉल न करें।

उन्होंने लोगों से कहा कि किसी भी कंपनी या सेवा के नाम पर आने वाले संदेश की पहले आधिकारिक माध्यम से पुष्टि करें। अनजान व्यक्ति के कहने पर बैंक खाते से जुड़ी जानकारी साझा करने या पैसे ट्रांसफर करने से भी बचना चाहिए।

पुलिस की ओर से पहले भी सलाह दी गई है कि utility applications केवल आधिकारिक वेबसाइट या verified app stores से ही डाउनलोड करें और OTP, PIN, पासवर्ड या बैंकिंग credentials किसी के साथ साझा न करें। साइबर ठगी होने पर तुरंत 1930 पर शिकायत करना महत्वपूर्ण है।

साइबर ठगी से बचने के लिए इन बातों का रखें ध्यान

  • अनजान नंबर से आए किसी भी APK लिंक को डाउनलोड न करें।
  • Adani Gas या किसी अन्य कंपनी के नाम से आए लिंक की आधिकारिक स्रोत से पुष्टि करें।
  • OTP, ATM PIN, CVV या बैंकिंग पासवर्ड किसी से साझा न करें।
  • अनजान व्यक्ति के कहने पर बैंक खाते में पैसे ट्रांसफर न करें।
  • मोबाइल में संदिग्ध APK इंस्टॉल हो गया है तो तुरंत बैंक और संबंधित सेवा प्रदाता से संपर्क करें।
  • खाते से अनधिकृत रकम निकलने पर तुरंत 1930 पर साइबर फ्रॉड की शिकायत करें।