उज्ज्वल दिशा अंबाला @ यमुनानगर के चर्चित यमुना ग्रैंड फाइव सीजन होटल से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने होटल सुरक्षा व्यवस्था और प्रबंधन की जिम्मेदारियों पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। दोस्तों के साथ खाना खाने पहुंचे एक युवक के डेढ़ घंटे तक लिफ्ट में फंसे रहने का मामला अब सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा का विषय बन गया है। घटना से जुड़ी वीडियो खुद पीड़ित पक्ष द्वारा बनाई गई है, जिसमें होटल स्टाफ, मैनेजर और लिफ्ट सुरक्षा को लेकर कई गंभीर दावे किए गए हैं।जानकारी के अनुसार कुछ दोस्त होटल में खाना खाने पहुंचे थे। इसी दौरान उनका एक साथी होटल की लिफ्ट में फंस गया। आरोप है कि युवक करीब डेढ़ घंटे तक लिफ्ट के भीतर बंद रहा। वीडियो में देखा और सुना जा सकता है कि मौके पर मौजूद कुछ वेटर और कर्मचारी लिफ्ट खोलने या किसी तरह मदद करने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन होटल प्रबंधन की भूमिका पर भारी नाराजगी दिखाई गई।
वीडियो में होटल मैनेजर को लेकर खासा गुस्सा व्यक्त किया गया है। आरोप लगाया गया कि घटना की जानकारी मिलने के बावजूद मैनेजर अपने ऑफिस से बाहर तक नहीं आया। हालांकि इस दावे की पुष्टि मामले की जांच के बाद ही की जा सकती है। लेकिन वीडियो वायरल होने के बाद यह मामला लोगों के बीच चर्चा का केंद्र बन गया है।पीड़ित पक्ष का कहना है कि होटल की ओर से तुरंत तकनीकी सहायता उपलब्ध नहीं करवाई गई। आरोप है कि आखिरकार खुद पीड़ितों ने टेक्नीशियन को फोन कर बुलाया, जिसके बाद लिफ्ट तोड़कर अंदर फंसे युवक को बाहर निकाला गया।
दूसरी ओर होटल प्रबंधन का कहना है कि यह एक तकनीकी खराबी थी। होटल ने घटना पर खेद जताते हुए कहा कि वह अपने मेहमानों के साथ खड़ा है और मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है। हालांकि सवाल यह उठ रहा है कि क्या केवल तकनीकी गलती कह देने भर से होटल अपनी जिम्मेदारियों से मुक्त हो सकता है?विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी होटल, रेस्टोरेंट या कमर्शियल बिल्डिंग में लगी लिफ्ट की नियमित जांच, सुरक्षा प्रमाणन और इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम अनिवार्य माना जाता है। यदि कोई व्यक्ति लंबे समय तक लिफ्ट में फंसा रहता है तो यह केवल तकनीकी खराबी नहीं बल्कि सुरक्षा प्रबंधन की विफलता भी मानी जा सकती है।
सबसे बड़ा सवाल यह भी है कि अगर इसी लिफ्ट में कोई बुजुर्ग, बच्चा, बीमार व्यक्ति या महिला फंस जाती तो स्थिति कितनी गंभीर हो सकती थी। लंबे समय तक बंद लिफ्ट में फंसे रहने से घबराहट, सांस लेने में दिक्कत, पैनिक अटैक और स्वास्थ्य संबंधी खतरे बढ़ सकते हैं।नियमों के अनुसार किसी भी व्यावसायिक भवन में लिफ्ट को लेकर नियमित मेंटेनेंस, इमरजेंसी अलार्म, हेल्प सिस्टम और प्रशिक्षित तकनीकी सहायता उपलब्ध होना जरूरी माना जाता है। कई राज्यों में बिना अधिकृत मेंटेनेंस और सुरक्षा निरीक्षण के लिफ्ट चलाना नियमों के खिलाफ माना जाता है। यदि लापरवाही साबित होती है तो बिल्डिंग प्रबंधन और संबंधित जिम्मेदार व्यक्तियों पर कार्रवाई भी हो सकती है।अब यह मामला केवल एक तकनीकी खराबी तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि होटल सुरक्षा, प्रबंधन की संवेदनशीलता और मेहमानों की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल बनकर सामने आ रहा है। वायरल वीडियो के बाद लोग यह जानना चाहते हैं कि आखिर इतनी बड़ी घटना के दौरान होटल प्रबंधन की वास्तविक भूमिका क्या थी और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।
