शिमला में भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री सुरेश भारद्वाज ने आपातकाल की 51वीं वर्षगांठ से पहले कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को संविधान और लोकतंत्र की रक्षा की बात करने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है, क्योंकि देश के इतिहास में लोकतंत्र पर सबसे बड़ा प्रहार 25 जून 1975 को लगाए गए आपातकाल के रूप में कांग्रेस सरकार ने ही किया था।
सुरेश भारद्वाज ने आरोप लगाया कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने अपने राजनीतिक हितों की रक्षा के लिए पूरे देश को एक तरह से जेल में तब्दील कर दिया था। उन्होंने कहा कि भाजपा 25 जून को पूरे देश में “संविधान हत्या दिवस” मनाएगी और लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले सेनानियों को सम्मानित किया जाएगा।
पूर्व मंत्री ने कहा कि स्वतंत्र भारत के इतिहास में तीन घटनाएं ऐसी हैं, जिन्होंने देश की आत्मा को झकझोर कर रख दिया। इनमें देश का विभाजन, 1975 का आपातकाल और 1984 के सिख विरोधी दंगे शामिल हैं। उन्होंने कहा कि 25 जून 1975 की रात देशभर में आपातकाल लागू कर नागरिकों के मौलिक अधिकारों को निलंबित कर दिया गया, प्रेस की स्वतंत्रता छीन ली गई और विपक्षी नेताओं को जेलों में डाल दिया गया।
उन्होंने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा इंदिरा गांधी के चुनाव को निरस्त किए जाने के बाद लोकतांत्रिक प्रक्रिया का सम्मान करने के बजाय कांग्रेस ने आपातकाल का रास्ता चुना। उस दौरान अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी, मोरारजी देसाई, जॉर्ज फर्नांडिस और चंद्रशेखर सहित हजारों नेताओं और कार्यकर्ताओं को मीसा कानून के तहत गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। उन्होंने कहा कि उस समय लोगों के पास न दलील का अधिकार था, न वकील का और न ही अपील का।
भारद्वाज ने आरोप लगाया कि आपातकाल के दौरान 39वें और 42वें संविधान संशोधन के माध्यम से लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने का प्रयास किया गया। न्यायपालिका की शक्तियों को सीमित किया गया, संसद और विधानसभाओं का कार्यकाल बढ़ाया गया तथा शीर्ष पदों के चुनावों को न्यायिक समीक्षा से बाहर करने की कोशिश की गई।
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उन्होंने कहा कि जबरन नसबंदी अभियान और सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग ने उस दौर को लोकतंत्र का सबसे काला अध्याय बना दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि आज वही कांग्रेस संविधान बचाने की बात कर रही है, जिसने सबसे अधिक बार संविधान में संशोधन किए और लोकतांत्रिक संस्थाओं का दुरुपयोग किया।
भाजपा नेता ने बताया कि 25 जून को शिमला में आयोजित “संविधान हत्या दिवस” कार्यक्रम में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल मुख्य वक्ता होंगे। इसके अलावा 27 जून को पालमपुर में आयोजित कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार मुख्य वक्ता के रूप में शामिल होंगे। कार्यक्रमों के दौरान आपातकाल से जुड़े दस्तावेजों और तथ्यों पर आधारित प्रदर्शनी लगाई जाएगी तथा लोकतंत्र सेनानियों और उनके परिजनों को सम्मानित किया जाएगा।
