अंबाला: अंबाला छावनी के ऐतिहासिक श्री सनातन धर्म मंदिर में जन्माष्टमी पर्व को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं। वर्ष 1932 में श्री सनातन धर्म सभा द्वारा स्थापित इस मंदिर में हर साल जन्माष्टमी का पर्व बड़ी श्रद्धा और धूमधाम से मनाया जाता है। इस बार भी मंदिर को भव्य तरीके से सजाया जा रहा है।
4 सितंबर को भगवान श्री कृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जाएगा। इस दौरान मंदिर में अलौकिक और इलेक्ट्रॉनिक झांकियां श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहेंगी।
राजस्थान के लाल पत्थर से बना है ऐतिहासिक मंदिर
अंबाला छावनी का श्री सनातन धर्म मंदिर अपनी वास्तुकला और खूबसूरत नक्काशी के लिए प्रसिद्ध है। मंदिर को राजस्थान के प्रसिद्ध लाल पत्थर से तैयार किया गया है। इसकी नक्काशी और स्थापत्य शैली राजस्थान के मंदिरों की याद दिलाती है।
जन्माष्टमी के मौके पर मंदिर को रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया जा रहा है। रात के समय रोशनी में मंदिर की खूबसूरती और भी निखरने की उम्मीद है।
10 से 15 क्विंटल ताजे फूलों से होगी सजावट
मंदिर के पुजारी पंडित बुद्धि वल्लभ के मुताबिक, इस बार मंदिर की सजावट में बड़ी मात्रा में फूलों का इस्तेमाल किया जा रहा है। करीब 10 से 15 क्विंटल ताजे फूलों से मंदिर को सजाया जाएगा। इसके अलावा लगभग 10 क्विंटल कृत्रिम फूलों का भी इस्तेमाल किया जाएगा।
खास बात यह है कि मंदिर की सजावट में इस्तेमाल होने वाले ताजे फूल असली होंगे, जिससे जन्माष्टमी पर मंदिर का नजारा और भी आकर्षक दिखाई देगा।
छह इलेक्ट्रॉनिक झांकियां बनेंगी आकर्षण
जन्माष्टमी के अवसर पर मंदिर में इस बार छह इलेक्ट्रॉनिक झांकियां श्रद्धालुओं के लिए सजाई जा रही हैं। इनमें भगवान श्री कृष्ण के जन्म से जुड़ी झांकी के साथ नंद बाबा द्वारा बाल कृष्ण को नदी पार ले जाने का प्रसंग भी दिखाया जाएगा।
इन झांकियों को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है।
रात 12 बजे होगी पूजा और आरती
मंदिर के पुजारी पंडित बुद्धि वल्लभ ने बताया कि जन्माष्टमी के दिन भगवान श्री कृष्ण के जन्म के समय रात 12 बजे पूजा और आरती की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि मंदिर में जन्माष्टमी का आयोजन 4 सितंबर को ही किया जाएगा और श्रद्धालुओं से किसी भी तरह की तारीख को लेकर भ्रम से बचने की अपील की।
दशकों से मंदिर से जुड़ा है श्रद्धालुओं का भावनात्मक रिश्ता
जन्माष्टमी की तैयारियों के बीच मंदिर पहुंच रही श्रद्धालु महिलाएं भी काफी उत्साहित नजर आ रही हैं। उनका कहना है कि इस बार मंदिर की सजावट पहले से भी ज्यादा खूबसूरत दिखाई देगी। श्रद्धालुओं के मुताबिक, रोशनी से सजी राधा-कृष्ण की मूर्तियां मंदिर की सुंदरता को और बढ़ा देती हैं।
कई श्रद्धालुओं का कहना है कि इस मंदिर में आकर उन्हें आध्यात्मिक शांति और सुकून मिलता है। मंदिर की सजावट देखने के लिए आसपास के क्षेत्रों के साथ-साथ दूर-दराज से भी लोग पहुंचते हैं।
40-45 साल से मंदिर को देखते आ रहे श्रद्धालु
श्रद्धालु अश्वनी भाटिया ने बताया कि वह पिछले 40 से 45 वर्षों से इस मंदिर को देखते आ रहे हैं। उनका जन्म भी इसी इलाके में हुआ और उनके माता-पिता भी यहां जन्माष्टमी के अवसर पर पूजा करने आते थे।
उन्होंने कहा कि मंदिर की राजस्थानी शैली की नक्काशी इसकी खूबसूरती में चार चांद लगाती है और हर साल जन्माष्टमी पर यहां का माहौल अलग ही दिखाई देता है।
दूर-दराज से पहुंचते हैं श्रद्धालु
श्री सनातन धर्म सभा के अध्यक्ष के अनुसार, जन्माष्टमी के दिन मंदिर में दूर-दराज से श्रद्धालु पहुंचते हैं। श्रद्धालु भगवान श्री कृष्ण के दर्शन और पूजा-अर्चना करने के बाद प्रसाद लेकर अपने घर लौटते हैं।
फिलहाल मंदिर में सजावट और झांकियों को अंतिम रूप देने का काम चल रहा है। 4 सितंबर की रात भगवान श्री कृष्ण के जन्मोत्सव के साथ अंबाला छावनी का यह ऐतिहासिक मंदिर श्रद्धा, रोशनी और भव्य सजावट से सराबोर नजर आएगा।
