अंबाला के गांव धन्यौड़ा में चार वर्षीय मासूम की खुले बोरवेल में गिरने से हुई दर्दनाक मौत के बाद भी जनस्वास्थ्य विभाग सबक लेता नजर नहीं आ रहा है। बराड़ा क्षेत्र के गांव होली में विभाग का एक पुराना बोरवेल पिछले कई महीनों से खुला पड़ा है, जिससे ग्रामीणों में किसी बड़े हादसे की आशंका बनी हुई है। ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद विभाग ने इसे बंद कराने या सुरक्षित करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते इस खुले बोरवेल को बंद नहीं किया गया तो यहां भी धन्यौड़ा जैसी दर्दनाक घटना दोहराई जा सकती है। विभाग की लापरवाही को लेकर गांव में नाराजगी का माहौल है और लोग जल्द कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
गांव होली के सरपंच बलविंदर सिंह ने बताया कि जलापूर्ति एवं जनस्वास्थ्य विभाग की ओर से जलघर-2 का पुराना बोरवेल पिछले वर्ष खराब हो गया था। इसके बाद कुछ दूरी पर नया बोरवेल स्थापित कर पेयजल आपूर्ति शुरू कर दी गई, लेकिन पुराने बोरवेल को आज तक बंद नहीं किया गया।
सरपंच ने बताया कि धन्यौड़ा में हुए हादसे के बाद जब उन्होंने मौके का निरीक्षण किया तो पाया कि पुराना बोरवेल अब भी खुला पड़ा है। ग्रामीणों ने भी उन्हें बताया कि यहां हमेशा बच्चों और पशुओं के गिरने का खतरा बना रहता है। उन्होंने इस संबंध में विभागीय अधिकारियों को जानकारी देकर तत्काल कार्रवाई की मांग की।
हालांकि सरपंच ने अपने स्तर पर फिलहाल बोरवेल को अस्थायी रूप से ढंकवा दिया है, लेकिन उनका कहना है कि स्थायी समाधान करना जनस्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी है। उन्होंने मांग की कि विभाग जल्द से जल्द खुले बोरवेल को पूरी तरह बंद करे, ताकि भविष्य में किसी मासूम की जान जोखिम में न पड़े।
धन्यौड़ा की दर्दनाक घटना के बाद अब सवाल यह है कि क्या जनस्वास्थ्य विभाग समय रहते कार्रवाई करेगा या फिर किसी और हादसे का इंतजार किया जाएगा। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि जिले में खुले पड़े सभी पुराने बोरवेलों का सर्वे कर उन्हें तत्काल सुरक्षित किया जाए, ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
यह भी पढ़ें: बठिंडा में 33 वर्षीय महिला की गोली मारकर हत्या, पति और उसके साथियों पर आरोप
