अंबाला। अंबाला कैंट की एक्स-आबकारी क्षेत्र की जमीनों को फ्री-होल्ड कराने की दशकों पुरानी मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है। इसी मांग को लेकर चित्रा सरवना के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने हरियाणा के निकाय मंत्री विपुल गोयल से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने मंत्री को ज्ञापन सौंपते हुए इन जमीनों पर लोगों को संपूर्ण एवं मालिकाना अधिकार देने की मांग उठाई।
वर्तमान और पूर्व पार्षदों सहित कई प्रतिनिधि रहे मौजूद
बताया गया कि प्रतिनिधिमंडल में वर्तमान और पूर्व पार्षदों के साथ सामाजिक नेता तथा स्थानीय प्रतिनिधि भी शामिल रहे। मुलाकात के दौरान एक्स-आबकारी क्षेत्र की जमीनों से जुड़े लंबे समय से चले आ रहे मुद्दे को मंत्री के समक्ष रखा गया और इसके स्थायी समाधान की मांग की गई।
चित्रा सरवना ने कहा कि अंबाला कैंट का सदर बाजार क्षेत्र शहर का एक प्रमुख आर्थिक केंद्र है। यहां बड़ी संख्या में लोग व्यापार और अन्य गतिविधियों से जुड़े हैं। हालांकि, जमीनों के फ्री-होल्ड न होने के कारण लोगों को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
मालिकाना हक नहीं होने से रजिस्ट्री और बैंक लोन में परेशानी
प्रतिनिधिमंडल के मुताबिक, जमीनों के फ्री-होल्ड न होने से लोगों को संपत्ति पर पूर्ण मालिकाना अधिकार नहीं मिल पाता। इसके अलावा रजिस्ट्री और बैंक से लोन जैसी सुविधाओं का लाभ लेने में भी परेशानी आती है।
चित्रा सरवना ने कहा कि यह कोई नई मांग नहीं है, बल्कि क्षेत्र के लोग पिछले कई दशकों से अपनी जमीनों को फ्री-होल्ड कराने की मांग करते आ रहे हैं। उनका कहना है कि इस समस्या का स्थायी समाधान होने से हजारों लोगों को राहत मिल सकती है।
पिछली सरकारों पर भी साधा निशाना
चित्रा सरवना ने आरोप लगाया कि पिछली सरकारों और स्थानीय नेताओं के पास निकाय मंत्रालय की जिम्मेदारी रहने के बावजूद इस महत्वपूर्ण मुद्दे का समाधान नहीं हो पाया। उन्होंने कहा कि अब वर्तमान सरकार और संबंधित मंत्री से उम्मीद है कि इस मामले में ठोस कदम उठाया जाएगा।
फैसला नहीं हुआ तो सड़क से मंत्रालय तक उठाएंगे आवाज
चित्रा सरवना ने चेतावनी दी कि यदि सरकार की ओर से जल्द कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो इस मुद्दे को लेकर आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ी तो सड़क से लेकर संबंधित मंत्रालयों तक आवाज उठाई जाएगी।
अब देखना होगा कि दशकों से लंबित अंबाला कैंट की एक्स-आबकारी जमीनों को फ्री-होल्ड कराने की मांग पर सरकार की ओर से क्या निर्णय लिया जाता है और कैंटवासियों को मालिकाना अधिकार दिलाने की दिशा में क्या कदम उठाए जाते हैं।
