अंबाला: अंबाला के साहा इलाके में उस समय स्कूल प्रशासन में हड़कंप मच गया, जब शिक्षा मंत्री अचानक सरकारी स्कूल का निरीक्षण करने पहुंच गए। बिना किसी पूर्व सूचना के पहुंचे शिक्षा मंत्री ने स्कूल परिसर की व्यवस्थाओं का जायजा लिया और विद्यार्थियों से बातचीत कर उनकी समस्याओं के बारे में भी जानकारी ली।
बच्चों ने कहा- स्कूल में कोई कमी नहीं
शिक्षा मंत्री ने निरीक्षण के दौरान स्कूली बच्चों से सीधे बातचीत की। बच्चों ने स्कूल में किसी तरह की बड़ी समस्या नहीं होने की बात कही। विद्यार्थियों के मुताबिक स्कूल में जरूरी व्यवस्थाएं उपलब्ध हैं और उन्हें किसी विशेष परेशानी का सामना नहीं करना पड़ रहा।
लेकिन इसके बाद जब स्कूल की जमीनी व्यवस्था देखी गई तो तस्वीर कुछ अलग नजर आई।
गंदे बाथरूम और लारवा ने उठाए सवाल
औचक निरीक्षण के दौरान स्कूल के बाथरूम गंदे हालत में दिखाई दिए। इतना ही नहीं, जहां पानी का कूलर होना चाहिए, वहां लारवा जमा हुआ नजर आया। इससे स्कूल परिसर में साफ-सफाई और मच्छरों से बचाव की व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर स्कूल में व्यवस्थाएं पूरी तरह दुरुस्त हैं और बच्चों को कोई परेशानी नहीं है, तो फिर निरीक्षण के दौरान गंदे बाथरूम और लारवा जैसी स्थिति क्यों दिखाई दी?
औचक निरीक्षण से सामने आई जमीनी हकीकत
शिक्षा मंत्री के अचानक पहुंचने से स्कूल प्रशासन को व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति दिखाने का मौका मिला। निरीक्षण के बाद मंत्री ने संबंधित अधिकारियों और स्कूल प्रशासन को व्यवस्थाओं में सुधार करने तथा साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए।
सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी पर भी बोले शिक्षा मंत्री
निरीक्षण के दौरान सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी का मुद्दा भी सामने आया। शिक्षा मंत्री ने इस संबंध में भी अपनी प्रतिक्रिया दी और सरकार की ओर से व्यवस्था को बेहतर करने की बात कही।
फिलहाल, शिक्षा मंत्री के इस औचक निरीक्षण ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि सरकारी स्कूलों में सिर्फ कागजों पर व्यवस्थाएं दुरुस्त होना काफी है या फिर जमीन पर भी उनकी नियमित निगरानी और जिम्मेदारी तय होना जरूरी है। खासकर स्कूलों में साफ-सफाई और पानी की व्यवस्था सीधे बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़ी है, इसलिए इन कमियों को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है।
