Saturday, September 12, 2026
अंबाला किसान जागरूकता शिविर

अंबाला में किसान जागरूकता शिविर बने संवाद का मंच, योजनाओं के साथ किसानों ने उठाए दूध के दाम और लोन पर सवाल

प्रशासन गांव-गांव पहुंचकर किसानों की समस्याएं सुन रहा, किसानों ने कहा- बढ़ती लागत के बीच आमदनी का संतुलन जरूरी

अंबाला। किसानों को कृषि, पशुपालन और विभिन्न सरकारी योजनाओं से जोड़ने के लिए अंबाला प्रशासन की ओर से चलाए जा रहे किसान जागरूकता शिविर अब ग्रामीण क्षेत्रों में संवाद का महत्वपूर्ण माध्यम बनते जा रहे हैं। इन शिविरों में जहां अधिकारियों की ओर से किसानों को सरकारी योजनाओं और सुविधाओं की जानकारी दी जा रही है, वहीं किसान भी अपनी समस्याओं और मांगों को खुलकर प्रशासन के सामने रख रहे हैं।

7 अगस्त से शुरू हुआ अभियान, 31 अगस्त को होगा समापन

मार्केट कमेटी के चेयरमैन जसविंदर सिंह के अनुसार किसान जागरूकता अभियान की शुरुआत 7 अगस्त को नग्गल गांव से हुई थी और अब यह पांचवें पड़ाव तक पहुंच चुका है। अभियान के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों की समस्याएं और सुझाव सुने जा रहे हैं। प्राप्त शिकायतों और सुझावों को संबंधित विभागों तक लिखित रूप में भेजकर कार्रवाई और समीक्षा की जा रही है। अभियान के तहत पंजोखरा साहिब और माणकपुर में दो शिविर आयोजित किए जाने बाकी हैं, जबकि इसका समापन 31 अगस्त को बड़ी सब्जी मंडी में किया जाएगा।

सरकारी योजनाओं की जानकारी के साथ समस्याओं पर भी चर्चा

शिविरों में कृषि, पशुपालन और अन्य विभागों के अधिकारी किसानों को विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी दे रहे हैं। किसानों का कहना है कि गांवों में इस तरह के शिविर आयोजित होने से उन्हें अलग-अलग विभागों की योजनाओं और प्रक्रियाओं के बारे में जानकारी एक ही स्थान पर मिल जाती है। गोबिंदगढ़ के किसान गुरमीत सिंह ने भी ऐसे शिविरों को उपयोगी बताते हुए कहा कि किसानों की समस्याएं सुनने के साथ उन्हें योजनाओं की जानकारी भी दी जा रही है और इस तरह के आयोजन लगातार होते रहने चाहिए।

किसानों ने दूध के दाम और पशु आहार की बढ़ती कीमतों पर उठाए सवाल

हालांकि जागरूकता शिविर में किसानों ने सरकारी योजनाओं के साथ कृषि और पशुपालन की जमीनी चुनौतियों को भी सामने रखा। किसानों का कहना है कि पशुपालन की लागत लगातार बढ़ रही है, जबकि दूध की खरीद कीमत उस अनुपात में नहीं बढ़ रही।

किसानों के अनुसार वीटा मिल्क प्लांट में छह फैट वाले दूध की कीमत करीब 50 रुपये प्रति लीटर मिल रही है, जबकि पशुओं की प्रमुख खुराक खल और बिनौला के दाम करीब 57 रुपये प्रति किलो तक पहुंच चुके हैं। किसानों का सवाल है कि बढ़ती लागत के बीच मौजूदा दूध कीमत पर पशुपालन को आर्थिक रूप से कैसे टिकाऊ बनाया जाए। किसानों ने दूध के दाम 12 से 15 रुपये प्रति फैट तय करने की मांग उठाई है।

पशु खरीदने के लिए लोन में भी दिक्कत का आरोप

किसानों ने बैंकों से मिलने वाले पशुपालन ऋण को लेकर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि बाजार में दुधारू पशुओं की कीमत के मुकाबले बैंक से मिलने वाला ऋण पर्याप्त नहीं होता, जिससे किसानों के लिए बेहतर नस्ल के पशु खरीदना मुश्किल हो जाता है। किसानों ने मांग की कि ऋण व्यवस्था को मौजूदा बाजार कीमतों और वास्तविक जरूरतों के अनुरूप बनाया जाए।

किसानों की शिकायतें सिर्फ कागजों तक सीमित न रहें

किसान जागरूकता शिविरों में अधिकारियों के पहुंचने को किसान सकारात्मक पहल मान रहे हैं, लेकिन उनका कहना है कि केवल योजनाओं की जानकारी देने से समस्या का समाधान नहीं होगा। बढ़ती पशु आहार लागत, दूध के दाम और बैंक ऋण जैसी समस्याओं पर भी ठोस कदम उठाने होंगे।

अब चुनौती प्रशासन के सामने है कि शिविरों में किसानों से मिली शिकायतें और सुझाव केवल रिकॉर्ड तक सीमित रहते हैं या इनका असर वास्तविक नीतिगत और जमीनी बदलाव के रूप में दिखाई देता है।