अंबाला: अंबाला में आवारा कुत्तों और बेसहारा पशुओं का आतंक लगातार बढ़ता नजर आ रहा है। कहीं आवारा कुत्ते बच्चों और महिलाओं को अपना शिकार बना रहे हैं तो कहीं सड़क पर घूमते बेसहारा पशु लोगों के लिए खतरा बन रहे हैं। ताजा मामला एक स्कूली छात्रा से जुड़ा है, जिस पर सड़क पर घूम रहे बेसहारा सांड ने हमला कर दिया। सांड ने छात्रा को दो बार पटककर घायल कर दिया। पूरी घटना CCTV कैमरे में कैद हो गई।
स्कूल से लौट रही छात्रा पर सांड का हमला
बताया जा रहा है कि छात्रा स्कूल से जा रही थी। इसी दौरान सड़क पर मौजूद बेसहारा सांड ने अचानक उस पर हमला कर दिया। हमले में छात्रा बुरी तरह घायल हो गई। गनीमत रही कि आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत मौके पर पहुंचकर बच्ची को सांड से बचाया और इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया।
CCTV फुटेज में सांड द्वारा छात्रा पर हमला किए जाने की घटना साफ तौर पर दिखाई दे रही है। घटना के बाद इलाके में लोगों में डर का माहौल है।
आवारा कुत्तों के हमले से भी दहशत
बेसहारा सांड के हमले के अलावा अंबाला में आवारा कुत्तों का आतंक भी लोगों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। पीड़ित परिवारों का आरोप है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ।
एक महिला ने बताया कि आवारा कुत्तों ने उसके बेटे पर हमला कर उसकी टांग बुरी तरह नोच दी। बच्चे को इलाज के लिए अस्पताल ले जाना पड़ा। महिला का दावा है कि उसके बेटे को कुत्तों के काटने के बाद बड़ी संख्या में इंजेक्शन लगवाने पड़े।
वहीं एक अन्य महिला ने बताया कि करीब तीन महीने पहले उसके बेटे को भी आवारा कुत्तों ने काट लिया था। पीड़ितों का आरोप है कि नगर परिषद में शिकायत देने के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।
EO बोले- पशुओं के लिए गौशाला में जगह की कमी
मामले को लेकर नगर परिषद अंबाला कैंट के EO देवेंद्र नरवाल का कहना है कि बेसहारा पशुओं और आवारा कुत्तों की समस्या अलग-अलग है। उन्होंने बताया कि बेसहारा पशुओं को पकड़कर गौशालाओं में भेजा जाता है, लेकिन वहां क्षमता से अधिक पशु होने के कारण जगह की समस्या सामने आती है।
EO के मुताबिक इस समस्या को लेकर जिला उपायुक्त और नगर निगम कमिश्नर को भी अवगत कराया गया है।
आवारा कुत्तों का टेंडर खत्म, दोबारा प्रक्रिया जल्द
आवारा कुत्तों को लेकर EO ने बताया कि करीब एक साल से कुत्तों को पकड़ने का टेंडर चल रहा था। उनके अनुसार इस दौरान करीब साढ़े तीन से चार हजार आवारा कुत्तों की स्टेरिलाइजेशन प्रक्रिया कराई गई। हालांकि यह टेंडर करीब डेढ़ महीने पहले समाप्त हो चुका है।
EO ने कहा कि टेंडर को दोबारा आगे बढ़ाने की प्रक्रिया जल्द की जाएगी, ताकि आवारा कुत्तों की समस्या पर कार्रवाई की जा सके।
सवाल यह है कि कार्रवाई कब होगी?
एक तरफ नगर परिषद अधिकारी कार्रवाई और टेंडर की प्रक्रिया की बात कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ लोगों का कहना है कि जब तक सड़क पर घूमते आवारा कुत्तों और बेसहारा पशुओं से राहत नहीं मिलती, तब तक खतरा बना रहेगा।
अब सवाल सिर्फ शिकायतों का नहीं, बल्कि लोगों की सुरक्षा का है। स्कूली बच्चों और महिलाओं पर हमलों की घटनाएं सामने आने के बाद क्या प्रशासन कोई ठोस और स्थायी समाधान निकालेगा या फिर अगली घटना का इंतजार किया जाएगा?
