राज्यसभा चुनाव से जुड़े विवाद और मीनाक्षी नटराजन के नामांकन खारिज किए जाने के मुद्दे को लेकर कांग्रेस नेताओं ने सत्याग्रह और भूख हड़ताल का आयोजन किया। इस दौरान कांग्रेस नेताओं ने भाजपा और चुनावी प्रक्रिया को लेकर कई सवाल उठाए।
राजीव गांधी पंचायत राज संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनील पवार ने कहा कि कांग्रेस पहले से ही SIR को लेकर सवाल उठाती रही है, लेकिन अब स्थिति और गंभीर होती नजर आ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस तरह मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज किया गया, उससे भाजपा की महिला विरोधी और गांधीवादी विचारधारा के प्रति नकारात्मक सोच सामने आती है।
सुनील पवार ने कहा कि मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है, फिर भी उन्हें सुधार का अवसर नहीं दिया गया। उन्होंने दावा किया कि अन्य राज्यों में नामांकन पत्रों में तकनीकी खामियों को सुधारने का मौका दिया गया, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं किया गया।
कांग्रेस नेताओं ने आशंका जताई कि यदि चुनावी प्रक्रिया में इस तरह की अनियमितताएं जारी रहीं तो भविष्य में पंचायत चुनावों में भी बड़े स्तर पर गड़बड़ी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने का प्रयास कर रही है।
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कांग्रेस नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव आयोग को कानूनी जवाबदेही से बाहर रखने जैसे प्रावधान लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंताजनक हैं। उनका कहना था कि जब देश में सभी नागरिक कानून के दायरे में आते हैं, तो चुनावी प्रक्रिया से जुड़े संस्थानों की जवाबदेही भी सुनिश्चित होनी चाहिए।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज होने के बाद दिल्ली में सत्याग्रह शुरू किया गया था, जिसके बाद अब देश के विभिन्न राज्यों में भी विरोध कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन आंदोलनों का उद्देश्य लोकतांत्रिक मूल्यों और निष्पक्ष चुनावी प्रक्रिया की रक्षा करना है।
