हरियाणा में मानसून की देरी का असर अब खेतों में साफ दिखाई देने लगा है। प्रदेश के कई जिलों की तरह कुरुक्षेत्र में भी किसान समय पर बारिश न होने से चिंतित हैं। मानसून की धीमी रफ्तार और बिजली आपूर्ति में आ रही दिक्कतों के कारण धान (पैडी) की रोपाई प्रभावित हो रही है। किसानों का कहना है कि खेतों तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंच पा रहा, जिससे खेती की लागत लगातार बढ़ती जा रही है।
करीब 30 वर्षों से खेती कर रहे किसान ईश्वर सिंह ने बताया कि सामान्य तौर पर हर साल 17 से 18 जून तक अच्छी बारिश हो जाती थी। इससे खेतों में पर्याप्त नमी बनी रहती थी और धान की रोपाई का कार्य तेजी से पूरा हो जाता था। लेकिन इस वर्ष मानसून की देरी के कारण खेत सूखे पड़े हैं और किसानों को ट्यूबवेल के सहारे सिंचाई करनी पड़ रही है।
किसानों का कहना है कि केवल बारिश की कमी ही नहीं, बल्कि बिजली आपूर्ति भी बड़ी समस्या बनी हुई है। बार-बार बिजली गुल होने, फॉल्ट आने और निर्धारित समय से कम बिजली मिलने के कारण खेतों में पर्याप्त सिंचाई नहीं हो पा रही। इससे धान की रोपाई का काम प्रभावित हो रहा है और डीजल व बिजली पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ रहा है।
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ईश्वर सिंह के अनुसार, कई किसानों के खेत अब भी खाली पड़े हैं क्योंकि पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं हो सका है। यदि जल्द बारिश नहीं हुई तो धान की फसल की उत्पादकता पर भी असर पड़ सकता है।
किसानों को अब उम्मीद है कि मानसून जल्द सक्रिय होगा और अच्छी बारिश से खेतों को पर्याप्त पानी मिलेगा। इससे धान की रोपाई में तेजी आएगी और किसानों को बढ़ती लागत से कुछ राहत मिल सकेगी।
