अंबाला में सांझा मोर्चा के बैनर तले निकाला रोष मार्च
अंबाला में हरियाणा रोडवेज (Haryana Roadways) की विभिन्न यूनियनों ने सोमवार को हरियाणा रोडवेज कर्मचारी (Roadways employees) सांझा मोर्चा के बैनर तले रोष मार्च निकाला। इस दौरान कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अपनी लंबित मांगों को लेकर नाराजगी व्यक्त की। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में कर्मचारी शामिल हुए और उन्होंने मांगों के समर्थन में तख्तियां हाथों में लेकर मार्च किया।
परिवहन मंत्री से मुलाकात न होने पर जताई नाराजगी
सांझा मोर्चा के पदाधिकारियों ने कहा कि वे अपनी मांगों को लेकर कई बार परिवहन मंत्री (Transport Minister) अनिल विज से मिलने का प्रयास कर चुके हैं। हालांकि, मंत्री के स्वास्थ्य कारणों से अब तक उनकी मुलाकात नहीं हो पाई है। कर्मचारियों का आरोप है कि वर्ष 2024 में सरकार बनने और अनिल विज के परिवहन मंत्री (Transport Minister) बनने के बाद से आज तक किसी भी यूनियन प्रतिनिधिमंडल के साथ औपचारिक बैठक नहीं की गई है।
मुख्यमंत्री और परिवहन मंत्री के नाम सौंपेंगे ज्ञापन
कर्मचारी नेताओं ने बताया कि अपनी मांगों को लेकर वे अंबाला (Divisional Commissioner) के माध्यम से मुख्यमंत्री और परिवहन मंत्री (Transport Minister) के नाम ज्ञापन सौंप रहे हैं। उनका कहना है कि यदि इसके बाद भी उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
25 जुलाई को आवास घेराव की चेतावनी
साथ ही सांझा मोर्चा के नेताओं ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार और परिवहन विभाग (Transport Department) उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेते हैं, तो 25 जुलाई को परिवहन मंत्री (Transport Minister) अनिल विज के आवास का घेराव किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कर्मचारी लंबे समय से अपनी मांगों के समाधान की प्रतीक्षा कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
प्रदर्शन के दौरान बताईं अपनी मांगें
वहीं प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों के हाथों में विभिन्न मांगों से संबंधित तख्तियां दिखाई दीं। मीडिया से बातचीत करते हुए कर्मचारी नेताओं ने बताया कि वे विभाग में रिक्त पदों को भरने, कर्मचारियों की लंबित समस्याओं का समाधान करने तथा अन्य मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की समस्याओं की लगातार अनदेखी की जा रही है, जिसके कारण उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
