Wednesday, July 29, 2026

UJJWAL DISHA : पलवल में वेतन वृद्धि को लेकर छिड़ा संग्राम थमा, डीसी और एसपी ने खुद संभाली कमान

उज्ज्वल दिशा।

हरियाणा के पलवल में पिछले 24 घंटों से चल रहा हाई-वोल्टेज ड्रामा अब शांत होता नजर आ रहा है। पृथला औद्योगिक क्षेत्र में निजी कंपनियों के कर्मचारियों द्वारा दिल्ली-आगरा नेशनल हाईवे जाम किए जाने के बाद प्रशासन पूरी तरह एक्शन मोड में है। आज खुद जिला उपायुक्त (DC) और पुलिस अधीक्षक (SP) ने कंपनियों का दौरा किया और मजदूरों के हक में बड़ा फैसला सुनाया है।

सोमवार को पृथला के पास नेशनल हाईवे-19 पर उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब सैकड़ों की संख्या में महिला और पुरुष कर्मचारियों ने सड़क पर बैठकर जाम लगा दिया। कर्मचारियों का आरोप था कि लंबे समय से वे वेतन बढ़ाने और न्यूनतम मजदूरी लागू करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन न तो कंपनी प्रबंधन सुन रहा है और न ही प्रशासन। इस जाम की वजह से दिल्ली-आगरा हाईवे पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।

कर्मचारियों की मांगें
सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम वेतन (Minimum Wage) लागू हो।

कंपनी में मिलने वाली अन्य बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं।

महंगाई के दौर में वेतन विसंगतियों को दूर किया जाए।

मामले की गंभीरता को देखते हुए मंगलवार को जिला उपायुक्त डॉक्टर हरीश कुमार वशिष्ठ और जिला पुलिस अधीक्षक नीतीश अग्रवाल ने लेबर विभाग के आला अधिकारियों के साथ मोर्चा संभाला। इन अधिकारियों ने सीधे पृथला क्षेत्र की निजी कंपनियों में दस्तक दी और कंपनी मालिकों के साथ सीधी बैठक की। प्रशासन ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि सरकार द्वारा तय किया गया न्यूनतम वेतन हर हाल में कर्मचारियों को मिलना चाहिए।

डीएसपी नरेंद्र खटाना ने स्थिति की जानकारी देते हुए बताया:
“कल कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर हाईवे जाम किया था। आज स्थिति पूरी तरह सामान्य है। डीसी साहब और एसपी साहब ने खुद कंपनी मालिकों से बात की है और उन्हें सरकार के नियमों के अनुसार वेतन देने के आदेश दिए हैं। हमने कर्मचारियों से भी बात की है और उन्हें आश्वस्त किया है कि उनका शोषण नहीं होने दिया जाएगा।”

अधिकारियों ने केवल मालिकों को निर्देश ही नहीं दिए, बल्कि सीधे वर्कशॉप फ्लोर पर जाकर महिला और पुरुष कर्मचारियों से मुलाकात भी की। प्रशासन ने कर्मचारियों को भरोसा दिलाया कि यदि इस महीने से उन्हें बढ़ा हुआ न्यूनतम वेतन नहीं मिलता, तो वे सीधे जिला प्रशासन को इसकी सूचना दे सकते हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यदि कंपनी मालिक आदेशों की अवहेलना करते हैं, तो उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

फिलहाल पलवल में स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। सभी कर्मचारी वापस अपने काम पर लौट आए हैं। प्रशासन के इस कड़े रुख ने उन निजी कंपनियों को कड़ा संदेश दिया है जो लेबर नियमों की अनदेखी कर रही थीं। अब देखना यह होगा कि प्रशासन के इन आदेशों का जमीनी स्तर पर कितनी जल्दी पालन होता है।